केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ आंदोलन: 10 दिनों से धरने पर डटे हजारों आदिवासी किसान
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मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बिजावर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ हजारों आदिवासी किसान पिछले 10 दिनों से ढोड़न बांध स्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें न तो उचित मुआवजा दिया गया है और न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। भीषण गर्मी के बीच न छांव की व्यवस्था है और न ही खाने-पीने की सुविधाएं, फिर भी किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
जल सत्याग्रह से बढ़ा आंदोलन, अब ‘सांकेतिक फांसी’ की तैयारी
मंगलवार को किसानों ने केन नदी में उतरकर घंटों जल सत्याग्रह किया। यह प्रदर्शन इस बात का प्रतीक था कि जिस नदी के लिए परियोजना बनाई जा रही है, वही उनके विस्थापन का कारण बन रही है। अब आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे बुधवार को सांकेतिक फांसी लगाकर विरोध दर्ज कराएंगे।
मिट्टी लेकर लिया संकल्प: “विरासत नहीं छोड़ेंगे”
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने अपने खेतों की मिट्टी हाथ में लेकर यह संकल्प लिया कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। ‘मिट्टी सत्याग्रह’ के तहत पुरुष, महिलाएं और बच्चे शरीर पर मिट्टी लगाकर विरोध कर रहे हैं। कई गांवों में समर्थन में चूल्हा तक नहीं जला और लोग सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
प्रशासन पर गंभीर आरोप: फर्जी ग्राम सभा और अवैध वसूली
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रुंज, मझगांय और नेगुवा बांधों के लिए कराई गई ग्राम सभाएं फर्जी हैं। साथ ही, दलालों के जरिए मुआवजे में कमीशन मांगा जा रहा है। वोटर आईडी और समग्र आईडी के नाम पर भी आदिवासियों से अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार पूर्ण मुआवजा और पुनर्वास से पहले किसी को बेघर नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रशासन नियमों की अनदेखी कर रहा है।
‘मिट्टी’ और ‘आकाश सत्याग्रह’ से उग्र हुआ विरोध
आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हजारों लोग केन नदी में उतरकर ‘मिट्टी सत्याग्रह’ कर रहे हैं, वहीं खुले आसमान के नीचे ‘आकाश सत्याग्रह’ भी जारी है। भूख हड़ताल के चलते कई महिलाओं और बुजुर्गों की हालत बिगड़ने लगी है, जबकि मौके पर स्वास्थ्य सुविधाएं नाकाफी हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की चेतावनी
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह हजारों लोगों के भविष्य का सवाल है और यदि पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो आंदोलन और उग्र होगा। प्रदर्शनकारियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो विरोध तेज किया जाएगा।
तनावपूर्ण स्थिति, सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल केन नदी किनारे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हजारों आदिवासी ‘जल, जंगल, जमीन’ के नारे लगाते हुए अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

