ABVP कार्यक्रम में छिड़ी जोरदार बहस: बेटियों की सुरक्षा पर उठे बड़े प्रश्न
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दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में आयोजित ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के एक कार्यक्रम के दौरान अचानक माहौल गर्मा गया। कार्यक्रम में मौजूद एक छात्रा ने मंच पर खड़े होकर संगठन की नीतियों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सवाल उठाए।
छात्रा ने कहा कि ABVP अक्सर युवाओं के अधिकारों और राष्ट्रवाद की बात करती है, लेकिन जब देश में महिलाओं के साथ होने वाले गंभीर अपराध सामने आते हैं, तब संगठन की आवाज़ उतनी मुखर दिखाई नहीं देती। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद छात्रों के बीच बहस शुरू हो गई।
बेटियों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
छात्रा ने अपने संबोधन में देश में हुई कुछ चर्चित घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सभी छात्र संगठनों को समान रूप से मुखर होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बेटियों की सुरक्षा, न्याय और सम्मान के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर आवाज़ उठाना जरूरी है।
उनका कहना था कि छात्र संगठनों का दायित्व सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के संवेदनशील मुद्दों पर भी स्पष्ट और मजबूत रुख लेना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद छात्रों के बीच तीखी बहस
छात्रा के सवालों के बाद कार्यक्रम में मौजूद कई छात्रों ने अपनी-अपनी राय रखी। कुछ छात्रों ने छात्रा के साहस की सराहना की और कहा कि विश्वविद्यालयों में खुलकर सवाल पूछना लोकतंत्र की ताकत है। वहीं, कुछ छात्रों और ABVP समर्थकों ने संगठन का बचाव करते हुए कहा कि ABVP हमेशा राष्ट्र और समाज के मुद्दों पर सक्रिय रहती है और किसी भी अपराध के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
घटना के बाद कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोग छात्रा की बेबाकी की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक बहस का हिस्सा बता रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसरों में इस तरह की घटनाएं अक्सर छात्र राजनीति और विचारधाराओं के टकराव को सामने लाती हैं, जिससे लोकतांत्रिक बहस को भी बल मिलता है।
विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और अभिव्यक्ति की आज़ादी
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होते हैं जहां युवा खुलकर अपने विचार व्यक्त करते हैं। छात्र संगठनों के कार्यक्रमों में सवाल-जवाब और बहस लोकतांत्रिक माहौल का हिस्सा माने जाते हैं। मिरांडा हाउस की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छात्र राजनीति में महिलाओं के मुद्दों और सुरक्षा जैसे विषयों को किस तरह प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मिरांडा हाउस में हुई यह घटना केवल एक छात्रा के सवाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने छात्र राजनीति, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा को तेज कर दिया है।
यह घटना इस बात का संकेत भी देती है कि विश्वविद्यालयों में युवा अब संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते।




