30 बच्चों की जान बचाकर शहीद हुई ‘काली’: ओडिशा से सामने आई वफादारी और बहादुरी की मिसाल

ओडिशा से सामने आई वफादारी और बहादुरी की मिसाल
प्रतिक्रियाएँ
Krishna Yadav

Krishna Yadav

8 घंटे पहले

Hamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.

Ravi sinha

Ravi sinha

8 घंटे पहले

Yeh news bahut zaroori hai public ke liye.

Anika Rajput

Anika Rajput

12 घंटे पहले

Poori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

12 घंटे पहले

Itni important news, dosto ko zaroor bhejo.

Reyansh Joshi

Reyansh Joshi

16 घंटे पहले

Yeh padh ke ankhe khul gayi, sabko dikhao.

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ओडिशा के मयूरभंज जिले के धीरकुला गांव से एक ऐसी भावुक घटना सामने आई है, जिसने इंसान और जानवर के रिश्ते को नए मायने दे दिए हैं। यहां ‘काली’ नाम की एक आवारा डॉग ने अपनी जान की परवाह किए बिना जहरीले सांप से लड़ते हुए करीब 30 मासूम बच्चों की जान बचा ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और लोगों ने काली को एक सच्चे रक्षक की तरह सम्मान दिया।

 

स्कूल के बाहर खेल रहे थे बच्चे, तभी आया खतरा
जानकारी के मुताबिक, गांव के श्री जगन्नाथ शिशु विद्या मंदिर के बाहर करीब 30 किंडरगार्टन बच्चे बैठे हुए थे। उसी दौरान एक जहरीला सांप धीरे-धीरे बच्चों की ओर बढ़ने लगा। बच्चे इस खतरे से पूरी तरह अनजान थे। तभी वहां मौजूद काली ने सांप को देख लिया और तुरंत बच्चों के सामने ढाल बनकर खड़ी हो गई।

 

सांप और काली के बीच हुआ जानलेवा संघर्ष
ग्रामीणों के अनुसार, काली ने बिना डरे सांप पर हमला कर दिया। काफी देर तक दोनों के बीच संघर्ष चलता रहा। इस दौरान सांप ने कई बार काली के चेहरे और मुंह पर डसा, लेकिन काली पीछे नहीं हटी। आखिरकार उसने सांप को मार गिराया और बच्चों को सुरक्षित बचा लिया। हालांकि तब तक जहर उसके शरीर में फैल चुका था और कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया।

 

गांववालों ने दी शहीद जैसी विदाई
जैसे ही काली की मौत की खबर गांव में फैली, हर कोई भावुक हो उठा। ग्रामीणों ने काली के शव को सफेद कपड़े में लपेटा, फूलों से सजाया और पूरे गांव में सम्मानपूर्वक अंतिम यात्रा निकाली। लोगों ने कहा कि काली कोई साधारण कुत्ता नहीं थी, बल्कि गांव के बच्चों की रक्षक थी।

 

सोशल मीडिया पर उमड़ा भावनाओं का सैलाब
इस घटना का वीडियो और खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। हजारों लोग काली को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई यूजर्स ने उसे “सच्चा हीरो”, “मूक रक्षक” और “वफादारी की मिसाल” बताया। वहीं कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए कि काली को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की गई।

 

इंसानियत को आईना दिखा गई काली
जहां अक्सर आवारा कुत्तों को डर और परेशानी के रूप में देखा जाता है, वहीं काली की यह कहानी साबित करती है कि जानवरों में भी संवेदना, साहस और वफादारी होती है। काली अब इस गांव के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी।

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Krishna Yadav

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8 घंटे पहले

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Ravi sinha

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Anika Rajput

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Tanya Bajaj

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16 घंटे पहले

Yeh padh ke ankhe khul gayi, sabko dikhao.

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