रायसेन कृषि महोत्सव में सियासी टकराव: जीतू पटवारी को पुलिस ने रोका
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मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में आयोजित ‘राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव’ के समापन दिवस पर उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पुलिस प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने से रोक दिया। यह आयोजन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में तीन दिनों से चल रहा था, जिसमें अंतिम दिन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल हुए।
आनंद नगर में बैरिकेडिंग, भारी सुरक्षा तैनात
सूत्रों के अनुसार, भोपाल के आनंद नगर इलाके में पुलिस प्रशासन ने मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया था। राज वेदांता स्कूल के सामने भारी पुलिस बल, वॉटर कैनन और दंगा रोधी उपकरणों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जैसे ही जीतू पटवारी अपने समर्थकों के काफिले के साथ वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस और पटवारी के बीच तीखी बहस
मौके पर जीतू पटवारी और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक बहस चली। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और वीवीआईपी प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए उन्हें रायसेन जाने की अनुमति नहीं दी। काफी प्रयासों के बाद भी रास्ता नहीं खुला, जिसके बाद पटवारी अपने समर्थकों के साथ वापस लौट गए।
किसानों से MSP पर चर्चा करना चाहते थे पटवारी
जीतू पटवारी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि वह कृषि मेले में जाकर किसानों से गेहूं की MSP, फसल के दाम और खेती की नई तकनीकों पर संवाद करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि “मैं भी किसान का बेटा हूं, मेरा परिवार भी खेती से जुड़ा है, इसलिए किसानों के बीच जाना चाहता था।”
कांग्रेस का आरोप- सरकार विपक्ष से घबराई
वापसी के बाद मीडिया से बातचीत में पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की मौजूदगी से डर गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले ही पत्र लिखकर कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी दी गई थी, फिर भी उन्हें जानबूझकर रोका गया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर किस कानून के तहत एक विपक्षी नेता को सार्वजनिक कार्यक्रम में जाने से रोका गया।
शिवराज और गडकरी की मौजूदगी से बढ़ा महत्व
रायसेन में आयोजित इस कृषि मेले को राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी की मौजूदगी ने इसकी राजनीतिक अहमियत और बढ़ा दी। ऐसे में जीतू पटवारी को रोके जाने की घटना ने पूरे आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया।
प्रशासन बनाम लोकतांत्रिक अधिकार की बहस
इस घटनाक्रम के बाद अब प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बता रहा है, जबकि प्रशासन सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।




