पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील पर विपक्ष का हमला: राहुल बोले- जनता पर डाली जा रही जिम्मेदारी

Ishaan Tiwari
5 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Aarohi Chaudhary
12 घंटे पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Anika Rajput
13 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Ritika Ghosh
14 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के असर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और अन्य संसाधनों की खपत कम करने की अपील पर देश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों ने पीएम मोदी की इस अपील को सरकार की विफलता बताते हुए तीखी आलोचना की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए जनता पर बोझ डाल रही है।
राहुल गांधी का हमला — “जनता से त्याग मांग रही सरकार”
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों से लगातार त्याग मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है, क्या नहीं खरीदना, कहां जाना है और कहां नहीं जाना।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि, “मोदी जी ने जनता से कहा — सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो और घर से काम करो। 12 साल में देश को इस हालत में पहुंचा दिया गया है कि हर जिम्मेदारी जनता पर डाली जा रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है और देश चलाना अब “Compromised PM” के बस की बात नहीं रह गया है।
खरगे ने भी साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री की अपील को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव से जूझ रही जनता को राहत देने के बजाय सरकार उनसे और त्याग की अपेक्षा कर रही है।
खरगे ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात कठिन हैं तो सरकार को ठोस आर्थिक रणनीति पेश करनी चाहिए, न कि आम लोगों पर बचत का दबाव डालना चाहिए।
हैदराबाद रैली में पीएम मोदी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से अपील की थी कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ा है।
पीएम मोदी ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय लोगों ने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया था। उन्होंने सुझाव दिया कि आज भी जरूरत पड़ने पर इन विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है ताकि ईंधन की खपत कम हो।
किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में उर्वरक सब्सिडी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की एक बोरी करीब 3000 रुपये की पड़ रही है, जबकि भारत सरकार किसानों को वही बोरी लगभग 300 रुपये में उपलब्ध करा रही है। पीएम ने इसे किसानों के हित में सरकार की बड़ी सहायता बताया।
बढ़ती महंगाई और वैश्विक संकट बना राजनीतिक मुद्दा
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेल बाजार में अस्थिरता का असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतें और आवश्यक वस्तुओं की लागत अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।







