“आसमान सच में उनका है”: 5 लाख रुपये खर्च कर बदली 24 बच्चों की सोच

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सोचिए, आप एयरपोर्ट के बाहर खड़े हैं और कोई आपसे कहे— “मुझे भी आसमान देखना है, बादल देखने हैं… मुझे भी साथ ले चलो।”
क्या आप उसकी 10 हजार रुपये की टिकट लेंगे? ज्यादातर जवाब होगा— नहीं।
लेकिन कर्नाटक के कोप्पल जिले में एक ऐसे शिक्षक हैं, जिनका दिल आसमान जितना बड़ा है और जिनकी सोच सैकड़ों बच्चों की जिंदगी बदल रही है।

जब एक शिक्षक ने बच्चों के सपनों को उड़ान दी
कर्नाटक के कोप्पल जिले के बहादुरबंदी गांव स्थित सरकारी हायर प्राइमरी स्कूल में 26 दिसंबर को कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। स्कूल के प्रधानाध्यापक बीरप्पा अंडागी ने अपनी निजी बचत से करीब 5 लाख रुपये खर्च कर कक्षा 5 से 8 तक के 24 छात्रों को उनकी जिंदगी की पहली हवाई यात्रा करवाई।

पहली बार एयरपोर्ट, पहली बार आसमान से दुनिया
इनमें से कई बच्चों ने न तो कभी एयरपोर्ट देखा था और न ही हवाई जहाज को इतने करीब से। हाथों में बोर्डिंग पास, आंखों में खुशी और हैरानी, और दिल में नए सपने— यह सफर बच्चों के लिए किसी जादू से कम नहीं था।

तोरणगल्लू के जिंदल एयरपोर्ट से जैसे ही विमान ने बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी, बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विमान के अंदर हंसी, तालियां और उत्साह की आवाजें गूंज उठीं, वहीं गांव में माता-पिता और ग्रामीण नम आंखों से बच्चों को आसमान में उड़ता देख रहे थे।

मेरिट परीक्षा पास करने पर मिला अनोखा इनाम
यह यात्रा यूं ही नहीं कराई गई थी। बीरप्पा अंडागी ने कक्षा 5 से 8 तक के छात्रों के लिए विशेष मेरिट परीक्षा आयोजित की। हर कक्षा से सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले 6 छात्रों को चुना गया।
उनका मानना है कि मेहनत करने वाले बच्चों को ऐसा अनुभव मिलना चाहिए, जो उनका आत्मविश्वास बढ़ाए।

कुल 40 लोग बने इस ऐतिहासिक सफर का हिस्सा
इस यात्रा में सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षक, मिड-डे मील योजना के कर्मचारी और स्कूल विकास एवं निगरानी समिति (SDMC) के सदस्य भी शामिल थे। कुल मिलाकर 40 लोग इस प्रेरणादायक सफर का हिस्सा बने।

“बच्चों की आंखों की खुशी ही मेरा इनाम है”
जब हेडमास्टर अंडागी से इस पहल की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा— “इन बच्चों में भविष्य के वैज्ञानिक, पायलट, अफसर और नेता छुपे हैं। मैं चाहता हूं कि वे यह विश्वास करें कि आसमान सच में उनका है।”
बेंगलुरु में बच्चों ने दो दिन तक शैक्षणिक संस्थानों और पर्यटन स्थलों का भी दौरा किया, जिससे उनकी सोच और अनुभव का दायरा और बड़ा हुआ।

सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ
इस अनोखी पहल की सांसद राजशेखर हिटनाल समेत कई लोगों ने सराहना की। सोशल मीडिया पर लोग इसे इस बात का जीता-जागता उदाहरण बता रहे हैं कि एक साधारण सरकारी स्कूल का शिक्षक भी असाधारण बदलाव ला सकता है।

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