फटाफट तलाक कितना सही: शादी, तलाक और बदलता कानून

शादी को भारतीय समाज में दो दिलों का पवित्र बंधन माना जाता है, जो जीवन को स्थिरता और पहचान देता है। इसके ठीक उलट तलाक एक ऐसा शब्द है, जो भावनात्मक, सामाजिक और कानूनी जटिलताओं से भरा होता है। भारत में तलाक की प्रक्रिया लंबे समय तक चलने वाली और मानसिक रूप से थका देने वाली मानी जाती रही है।
लेकिन बीते कुछ वर्षों में अदालतों का नजरिया तेजी से बदला है। हाल ही में 17 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले ने म्यूचुअल कंसेंट डिवोर्स की प्रक्रिया को और सरल कर दिया है, जिससे ‘फटाफट तलाक’ की बहस फिर से तेज हो गई है।
क्या है म्यूचुअल कंसेंट डिवोर्स?
हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 13B(2) के तहत म्यूचुअल कंसेंट डिवोर्स का प्रावधान है। इसमें पति-पत्नी दोनों की सहमति से तलाक लिया जाता है। पहले इसके लिए शर्त थी कि कपल कम से कम एक साल अलग-अलग रह रहा हो और इसके बाद 6 महीने का कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा किया जाए।







