Gandhi Jayanti Tributes: राजघाट पर बापू को नमन, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेSapne dekhne waale hi unhe poora karte hain.
Yash Kulkarni
3 घंटे पहलेYeh khabar padh ke dil bhar aaya, kya himmat hai!
Vivaan Gupta
3 घंटे पहलेSapne dekhne waale hi unhe poora karte hain.
Kavya Mishra
5 घंटे पहलेYeh khabar padh ke dil bhar aaya, kya himmat hai!
Sai Mehta
5 घंटे पहलेHaar ke baad jeetna hi asli champion ki pehchaan hai.
Shruti Bajpai
8 घंटे पहलेIs insaan ki journey bahut inspiring hai, salute!
Anika Rajput
8 घंटे पहलेIs insaan ki journey bahut inspiring hai, salute!
राजघाट पर बापू को श्रद्धांजलि
देश शुक्रवार को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मना रहा है। इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित राजघाट पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत कई प्रमुख नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। राजघाट पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने शांति और अहिंसा को याद किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष के बीच गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने गांधीजी के सर्वोदया के विचार का भी उल्लेख किया।
PM मोदी समेत कई नेताओं ने किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई नेताओं ने गांधी जयंती पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। गांधीजी के सत्य, अहिंसा और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को इस अवसर पर याद किया गया।
राजघाट पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा
गांधी जयंती के अवसर पर राजघाट में सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। PIB के अनुसार 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर सुबह 7:30 बजे सर्वधर्म प्रार्थना सभा का कार्यक्रम निर्धारित था।
गांधीजी के विचार आज भी प्रासंगिक
2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सत्याग्रह और अहिंसा को प्रमुख साधन बनाया। उनकी जयंती पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र भी 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने भी अपने संदेश में गांधीजी के शांति, अहिंसा और सर्वोदया के विचारों को आज के समय से जोड़ा।








