इंसाफ की मांग के बीच पुलिस जवाबदेही पर उठे सवाल: सोशल मीडिया पर दो राय, कानून सबके लिए बराबर की मांग
पुलिस कार्रवाई पर उठे जवाबदेही के सवाल मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून का पालन करवाने की जिम्मेदारी पुलिस की है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में कानून से बाहर जाकर कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। उनका तर्क है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोष तय करने का अधिकार केवल न्यायालय को है, न कि किसी अधिकारी को। एक पक्ष का समर्थन, दूसरे के लिए समान कानून की मांग मामले में सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक वर्ग भारत तिवारी जैसे मामलों में पुलिस की सख्त कार्रवाई का समर्थन करता है, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि यदि किसी अन्य मामले में पुलिस अधिकारी पर कानून से बाहर जाकर कार्रवाई करने के आरोप लगते हैं, तो उसके खिलाफ भी समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। कानून के समक्ष सभी नागरिक और अधिकारी बराबर हैं, इसलिए जवाबदेही भी सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। पूरे समाज को निशाना बनाने पर विशेषज्ञों की चिंता विश्लेषकों का कहना है कि किसी एक आरोपी, अधिकारी या व्यक्ति के कृत्य के आधार पर पूरे समाज, जाति या समुदाय को दोषी ठहराना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर की जा रही सामान्यीकृत (Generalization) टिप्पणियां सामाजिक तनाव बढ़ा सकती हैं। उनका मानना है कि इस मामले का केंद्र बिंदु पीड़िता को न्याय दिलाना और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना होना चाहिए, न कि इसे जातीय या सामुदायिक टकराव का रूप देना।