AI बन रहा साइबर अपराधियों का नया हथियार: कंपनियों और आम यूजर्स के लिए क्यों बढ़ा खतरा?आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने तकनीक की दुनिया को तेजी से बदल दिया है, लेकिन अब इसका गलत इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन रहा है। AI की मदद से अपराधी फर्जी ई-मेल, मैसेज, आवाज और वीडियो पहले से कहीं ज्यादा वास्तविक बना सकते हैं। इससे आम यूजर्स के साथ-साथ बड़ी कंपनियों के लिए भी साइबर सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है। AI से ज्यादा खतरनाक हो रही फिशिंग पहले फिशिंग ई-मेल में भाषा की गलतियां या अजीब लिंक देखकर धोखाधड़ी का अंदाजा लगाया जा सकता था। अब जनरेटिव AI की मदद से साइबर अपराधी व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर बेहद विश्वसनीय संदेश तैयार कर सकते हैं। AI का इस्तेमाल ई-मेल, SMS, सोशल मीडिया मैसेज और यहां तक कि रियल-टाइम बातचीत को अधिक विश्वसनीय बनाने में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यूजर से पासवर्ड, OTP, बैंकिंग जानकारी या कंपनी के संवेदनशील डेटा हासिल करना हो सकता है। डीपफेक और AI वॉयस क्लोनिंग ने बढ़ाई चिंता AI के जरिए किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरे की नकल करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। अपराधी किसी अधिकारी, रिश्तेदार, बॉस या कारोबारी की नकली आवाज बनाकर पैसे ट्रांसफर करने या गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बना सकते हैं। हालिया शोध में भी सामने आया है कि आधुनिक AI-generated आवाज को इंसानों के लिए पहचानना मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर तब, जब आवाज के केवल छोटे हिस्से को बदला गया हो।