₹200 Crore CSR Racket: ईडी ने 200 करोड़ रुपये के CSR फंड रैकेट का किया पर्दाफाश

Kavya Mishra
3 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Ravi sinha
4 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Kunal Rao
5 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Neel Saxena
6 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Pooja Reddy
7 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Priya Iyer
8 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Vaishali shinde
10 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ayaan Khan
10 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
ईडी ने 200 करोड़ रुपये के CSR फंड रैकेट का किया पर्दाफाश
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉर्पोरेट घरानों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) और पब्लिक सेक्टर बैंकों से जुड़े कथित CSR फंड रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। एजेंसी के अनुसार, करीब 200 करोड़ रुपये के CSR फंड को इस कथित नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया। जांच में CSR योगदान को कमीशन काटकर नकद में वापस करने का आरोप भी सामने आया है।
फर्जी डॉक्टर के ट्रस्टों के जरिए फंड की हेराफेरी का आरोप
ED के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह ने करीब तीन दशकों तक खुद को डॉक्टर के रूप में पेश किया, जबकि उसके पास मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता और मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण नहीं था। एजेंसी का आरोप है कि उसने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े CSR प्रोजेक्ट्स के लिए कई चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं संचालित कीं, जिनके जरिए PSU और निजी कंपनियों से CSR फंड जुटाया गया।
40 PSU और पब्लिक सेक्टर बैंकों से जुड़े फंड की जांच
ED के अनुसार, देशभर में कम से कम 40 PSU और पब्लिक सेक्टर बैंकों ने आरोपियों द्वारा संचालित ट्रस्टों को CSR डोनेशन दिया। एजेंसी की जांच में आरोप है कि कुछ CSR प्रोजेक्ट्स प्राप्त फंड के अनुपात में पूरे नहीं किए गए और वेंडर के बिल बढ़ाकर दिखाए गए। अतिरिक्त रकम को कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए आगे भेजा गया।
महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में तलाशी
ED की मुंबई जोनल ऑफिस-I ने 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में आठ स्थानों पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान करीब 21 लाख रुपये की नकदी के साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।
बिचौलियों और शेल कंपनियों का नेटवर्क सामने आया
जांच में CSR एजेंटों और बिचौलियों के ऐसे नेटवर्क का भी पता चला, जो कथित तौर पर CSR फंड को ट्रस्टों तक पहुंचाने में मदद करते थे। ED के अनुसार, इसके बाद रकम को शेल कंपनियों के जरिए आगे बढ़ाया जाता था। एजेंसी ने यह भी कहा है कि कई ऐसी संस्थाएं GST धोखाधड़ी से जुड़ी जांचों में पहले से संदिग्ध रही हैं।
कमीशन और किकबैक का भी आरोप
ED के मुताबिक, CSR फंड हासिल कराने में मदद करने वाले बिचौलियों और एजेंटों को कथित तौर पर कमीशन या किकबैक दिया जाता था। एजेंसी की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि ट्रस्टों के जरिए आए फंड को किन संस्थाओं के माध्यम से आगे भेजा गया और इस रकम से किन लोगों को कथित तौर पर लाभ मिला। मामले में आगे की जांच जारी है।








