भारत-चिली व्यापार वार्ता में तेजी: व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर

Anika Rajput
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Sneha Menon
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Riya Jain
8 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Ishaan Tiwari
9 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Sai Mehta
9 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Trapti Tanwar
10 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Diya Gupta
11 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Sonu rai
11 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Riya Jain
13 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
भारत और चिली के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर व्यापार वार्ता में तेजी आ गई है। भारत ने इस वर्ष के अंत तक चिली के साथ प्रस्तावित CEPA को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करना तथा कारोबारी संबंधों को अधिक मजबूत और व्यापक बनाना है। भारत और चिली के बीच मौजूदा व्यापार व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी का ढांचा तैयार किया जा रहा है। इससे दोनों देशों के उद्योगों और कारोबारियों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। समझौते के पूरा होने के बाद भारत और चिली के बीच आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है।
सैंटियागो में हुई उच्च स्तरीय बैठक
CEPA वार्ता की प्रगति की समीक्षा के लिए 26 अगस्त 2026 को चिली की राजधानी सैंटियागो में भारत और चिली के अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जबकि चिली की ओर से अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उप-मंत्री पाउला एस्तेवेज वीनस्टीन शामिल हुईं। दोनों पक्षों ने अब तक हुई बातचीत की प्रगति की समीक्षा की और समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों को जल्द सुलझाने पर चर्चा की। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप दिया जाए। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को व्यापारिक संबंधों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में CEPA के विभिन्न प्रावधानों पर बातचीत जारी रहने की उम्मीद है।
व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे
प्रस्तावित CEPA का मुख्य उद्देश्य भारत और चिली के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देने के साथ निवेश के नए अवसर पैदा करना है। समझौते के जरिए दोनों देशों के कारोबारी बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी के अवसर तलाश सकेंगे। भारत की ओर से तकनीक, प्रतिभा और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने और दोनों देशों के उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार करने पर चर्चा हो रही है। CEPA से छोटे और बड़े दोनों प्रकार के कारोबारियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। भारत और चिली के बीच आर्थिक संबंधों को लंबे समय के लिए मजबूत आधार देने में यह समझौता अहम भूमिका निभा सकता है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर भी नजर
भारत-चिली आर्थिक साझेदारी में ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों का क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चिली तांबा और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है, जबकि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों के लिए ऐसे खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते से महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और उनसे जुड़े कारोबार में सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही भारत की कंपनियों के लिए चिली के ऊर्जा और खनन क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी व्यापार विस्तार की संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे भारत के उद्योगों को दक्षिण अमेरिकी बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
भारत का चिली को निर्यात बढ़ा
भारत और चिली के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार की दिशा में बढ़े हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का चिली को निर्यात लगभग 1.2 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5.8 प्रतिशत अधिक बताया गया है। वहीं चिली से भारत का आयात लगभग 5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य वस्तुओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार में संतुलन और नए क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाना भी CEPA वार्ता का अहम हिस्सा है। भारत चाहता है कि समझौते के माध्यम से उसके उत्पादों और सेवाओं के लिए चिली के बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध हों। व्यापार बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियों के बीच निवेश, साझेदारी और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मौजूदा PTA को CEPA में अपग्रेड करने की तैयारी
भारत और चिली के बीच वर्ष 2007 से सीमित तरजीही व्यापार समझौता (PTA) लागू है, जिसके तहत कुछ उत्पादों पर व्यापारिक रियायतें उपलब्ध हैं। अब दोनों देश इस मौजूदा व्यवस्था को अधिक व्यापक और आधुनिक आर्थिक साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। CEPA के जरिए केवल टैरिफ में बदलाव ही नहीं बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की कोशिश की जा रही है। भारत ने वार्ता के दौरान संतुलित, व्यावहारिक और दोनों देशों के लिए लाभकारी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया है। यदि दोनों पक्ष तय समयसीमा के भीतर लंबित मुद्दों पर सहमति बना लेते हैं तो वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। भारत-चिली CEPA के लागू होने से दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को आने वाले वर्षों में नई दिशा मिलने की उम्मीद है।








