सेंसेक्स 2500 अंक लुढ़का: निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ स्वाहा

निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ स्वाहा

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गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों को झकझोर कर रख दिया। बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि दिनभर स्थिति संभल नहीं पाई।
बीएसई का सेंसेक्स करीब 2496 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 775 अंक टूटकर 23,002 पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 2700 अंक से ज्यादा और निफ्टी 850 अंक तक गिर गया था, जो बाजार में घबराहट का बड़ा संकेत है।

₹12 लाख करोड़ की दौलत साफ, निवेशकों को बड़ा झटका
इस भारी गिरावट के चलते निवेशकों को करीब ₹12 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप जहां पहले 438 लाख करोड़ रुपये था, वह गिरकर 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट बताती है कि बाजार में किस स्तर की तबाही आई है।

हर सेक्टर में गिरावट, बैंकिंग से IT तक सब धड़ाम
गुरुवार की गिरावट का असर बाजार के हर सेक्टर पर पड़ा।
सबसे ज्यादा नुकसान इन सेक्टर्स में देखा गया: बैंकिंग (Nifty Bank), ऑटो, IT, FMCG, PSU Banks, लार्जकैप से लेकर स्मॉलकैप तक सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए, जिससे साफ है कि यह गिरावट व्यापक स्तर पर रही।

शेयर बाजार क्रैश के बड़े कारण
1. मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध तनाव :
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल : क्रूड ऑयल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों बढ़ती हैं।
3. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 93.99 के स्तर तक गिर गया, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और पूंजी का बहिर्वाह बढ़ गया।
4. विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली : मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से ₹88,000 करोड़ से ज्यादा निकाल चुके हैं। इससे बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है।
5. India VIX में उछाल (डर का संकेत) : India VIX, जिसे बाजार का “फियर इंडेक्स” कहा जाता है, 22% तक उछल गया, जो बढ़ती अस्थिरता का संकेत है।
6. HDFC Bank का असर : एचडीएफसी बैंक में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद शेयर में 8% तक गिरावट आई, जिसने बाजार पर और दबाव बढ़ा दिया।

ग्लोबल बाजारों का भी बुरा हाल
भारतीय बाजार ही नहीं, एशियाई बाजार भी भारी गिरावट में रहे:
जापान का Nikkei,
दक्षिण कोरिया का Kospi,
हांगकांग का Hang Seng,
इन बाजारों में भी 5-6% तक गिरावट देखने को मिली, जिससे ग्लोबल सेंटीमेंट कमजोर हुआ।

विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर है। मिडिल ईस्ट में स्थिति सामान्य होने तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

निवेशकों के लिए सलाह
घबराहट में शेयर बेचने से बचें,
लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान दें,
मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स चुनें,
ग्लोबल संकेतों पर नजर रखें,

गुरुवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज हो गया। मिडिल ईस्ट तनाव, महंगे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार को हिला दिया। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर रहेगी।

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