'The Revolutionaries' Review: भुवन बाम बने रास बिहारी बोस

भुवन बाम बने रास बिहारी बोस
प्रतिक्रियाएँ
Monika Das

Monika Das

7 घंटे पहले

Yeh show sach mein zabardast hai, sabko dekhna chahiye.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

8 घंटे पहले

Celebrity ki yeh baat sun ke haiaran reh gaye.

Neel Saxena

Neel Saxena

9 घंटे पहले

Fans ka reaction toh dekhne wala hoga!

Anika Rajput

Anika Rajput

11 घंटे पहले

Filmi duniya ka yeh drama khatam hone wala nahi.

Pranav Srivastava

Pranav Srivastava

12 घंटे पहले

Entertainment duniya mein naya chapter shuru ho gaya.

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम की उन कहानियों को पर्दे पर लाने की कोशिश की गई है, जिनका जिक्र आम तौर पर कम होता है। निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। सीरीज में भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतिभा रांटा, गुरफतेह पीरजादा और जेसन शाह जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। कहानी का केंद्र रास बिहारी बोस और उनके साथ अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी हैं।

 

रास बिहारी बोस के संघर्ष से शुरू होती है कहानी
सीरीज की कहानी रास बिहारी बोस के किरदार से शुरू होती है, जिसे भुवन बाम ने निभाया है। बोस ब्रिटिश शासन के खिलाफ लगातार क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहते हैं और अंग्रेजी हुकूमत की नजर में मोस्ट वॉन्टेड बन जाते हैं। देश के अलग-अलग शहरों में मौजूद उनके सहयोगियों और गुप्त नेटवर्क की मदद से वह अंग्रेजों से बचते हुए आजादी की लड़ाई जारी रखते हैं।
इसी दौरान उनकी मुलाकात सचिंद्रनाथ सान्याल से होती है, जिनका किरदार रोहित सराफ ने निभाया है। वहीं गुरफतेह पीरजादा बाघा जतिन की भूमिका में दिखाई देते हैं। तीनों मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ योजनाएं बनाते हैं और हथियार जुटाने तथा अंग्रेजों पर हमले की रणनीति तैयार करते हैं।

 

क्रांति के साथ निजी जिंदगी और रिश्तों की कहानी
‘द रिवोल्यूशनरीज’ सिर्फ राजनीतिक संघर्ष और एक्शन तक सीमित नहीं रहती। सीरीज में क्रांतिकारियों की निजी जिंदगी, उनके रिश्ते, दोस्ती, प्रेम, त्याग और मुश्किल फैसलों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। सचिंद्रनाथ सान्याल और प्रतिभा लाहिड़ी के बीच का रिश्ता इसी पहलू को सामने लाता है।
सीरीज यह दिखाने की कोशिश करती है कि देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले इन युवाओं को सिर्फ अंग्रेजों से ही नहीं, बल्कि अपने निजी जीवन और भावनात्मक चुनौतियों से भी जूझना पड़ा।

 

भुवन बाम का गंभीर अंदाज बना आकर्षण
रास बिहारी बोस के किरदार में भुवन बाम अपनी कॉमेडी वाली लोकप्रिय छवि से बिल्कुल अलग नजर आते हैं। उनके गंभीर हाव-भाव, शांत अंदाज और चेहरे के एक्सप्रेशन किरदार को प्रभावशाली बनाते हैं। खासतौर पर बिना ज्यादा संवाद के भी भाव व्यक्त करने वाले दृश्यों में उनका अभिनय ध्यान खींचता है।
भुवन ने बोस के साहस, संयम और मुश्किल परिस्थितियों में खुद को बचाए रखने की क्षमता को पर्दे पर उतारने की अच्छी कोशिश की है।

 

रोहित सराफ और प्रतिभा रांटा ने भी छोड़ी छाप
सचिंद्रनाथ सान्याल के किरदार में रोहित सराफ ने क्रांतिकारी विचारों और निजी भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। प्रतिभा रांटा ने प्रतिभा लाहिड़ी की भूमिका में मजबूती और संवेदनशीलता दिखाई है। दोनों के बीच का प्रेम प्रसंग कहानी में भावनात्मक पहलू जोड़ता है, हालांकि कुछ जगहों पर यही ट्रैक जरूरत से ज्यादा दोहराया हुआ महसूस हो सकता है।

 

गुरफतेह पीरजादा बने बाघा जतिन
गुरफतेह पीरजादा ने बाघा जतिन के किरदार में शांत लेकिन मजबूत व्यक्तित्व दिखाया है। एक्शन दृश्यों में उनका अंदाज प्रभावी लगता है। हालांकि, कहानी में उनके किरदार को अपेक्षाकृत ज्यादा समय और विस्तार मिल सकता था। बाघा जतिन की कहानी को और विस्तार मिलने से सीरीज का भावनात्मक प्रभाव और मजबूत हो सकता था।

 

जेसन शाह का जनरल डायर वाला किरदार
जेसन शाह ने जनरल डायर की भूमिका निभाई है और ब्रिटिश पक्ष के विरोधी किरदार के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। उनका किरदार क्रांतिकारियों के सामने लगातार खतरा बनाए रखता है और कहानी के तनाव को बढ़ाने में मदद करता है। सपोर्टिंग कास्ट में पाओली दाम और अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को गंभीरता से निभाया है।

 

1911-12 के दौर को पर्दे पर उतारने की कोशिश
सीरीज की खासियतों में इसका पीरियड सेटअप भी शामिल है। वाराणसी, कोलकाता और अमृतसर जैसे शहरों में शूटिंग के साथ उस दौर के दिल्ली और दूसरे स्थानों का माहौल तैयार करने की कोशिश की गई है। कॉस्ट्यूम, सेट और लोकेशन कहानी को ऐतिहासिक समय से जोड़ने में मदद करते हैं।
1911 के बाद दिल्ली को राजधानी बनाए जाने के दौर से जुड़ी घटनाओं से लेकर रास बिहारी बोस के भारत से बाहर जाने तक की कहानी को सीरीज में शामिल किया गया है।

 

संजीव सान्याल की किताब से प्रेरित कहानी
‘द रिवोल्यूशनरीज’ की कहानी संजीव सान्याल की नॉन-फिक्शन किताब ‘Revolutionaries: The Other Story of How India Won Its Freedom’ से प्रेरित है। सीरीज उन क्रांतिकारियों पर फोकस करती है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना था।
कहानी में यह दिखाया गया है कि किस तरह युवाओं ने गुप्त नेटवर्क तैयार किए, अंग्रेजी शासन के खिलाफ योजनाएं बनाईं और देश की आजादी के लिए व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं तक का त्याग किया।

 

8 एपिसोड में आगे बढ़ती है कहान
‘द रिवोल्यूशनरीज’ में कुल 8 एपिसोड हैं और ज्यादातर एपिसोड लगभग 45 मिनट के हैं। कहानी में क्रांति, एक्शन और निजी रिश्तों को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है। कई घटनाएं एक के बाद एक सामने आती हैं, जिससे सीरीज दर्शकों की रुचि बनाए रखने में सफल रहती है।
हालांकि, कुछ हिस्सों में कहानी थोड़ी दोहराव वाली महसूस होती है। खासकर प्रेम कहानी से जुड़े कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था। इसी तरह बाघा जतिन और रास बिहारी बोस की निजी जिंदगी को ज्यादा विस्तार देने से कहानी को और गहराई मिल सकती थी।

 

सीरीज की सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय और कलाकारों का प्रदर्शन है। ऐतिहासिक घटनाओं को युवा क्रांतिकारियों की नजर से दिखाने की कोशिश कहानी को अलग बनाती है। क्रांतिकारी आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को भी कहानी में जगह दी गई है, जो इसका महत्वपूर्ण पक्ष है।
निर्देशन, पीरियड सेटिंग और कलाकारों के प्रदर्शन की वजह से दर्शक उस दौर के वातावरण से जुड़ने की कोशिश कर सकते हैं। म्यूजिक भी केवल पारंपरिक देशभक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कहानी के अलग-अलग भावनात्मक और संघर्षपूर्ण हिस्सों के अनुरूप अलग-अलग रंग प्रस्तुत करता है।

 

कहां कमजोर पड़ती है सीरीज?
सीरीज में एडिटिंग और सिनेमैटोग्राफी के कुछ हिस्से और बेहतर किए जा सकते थे। कुछ दृश्यों को जरूरत से ज्यादा खींचा गया है, जबकि कुछ महत्वपूर्ण किरदारों को अपेक्षाकृत कम स्क्रीन टाइम मिला है।
सचिंद्रनाथ सान्याल और प्रतिभा लाहिड़ी की प्रेम कहानी में कुछ भावनाओं की पुनरावृत्ति भी कहानी की गति को प्रभावित करती है। इसके अलावा, रास बिहारी बोस मुख्य किरदार होने के बावजूद उनकी निजी जिंदगी को उतनी गहराई नहीं मिलती, जितनी अन्य कुछ पात्रों को दी गई है।

 

‘द रिवोल्यूशनरीज’ क्यों देखें?
अगर आपको ऐतिहासिक ड्रामा, स्वतंत्रता संग्राम, क्रांतिकारी आंदोलनों और देशभक्ति से जुड़ी कहानियां पसंद हैं, तो ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है। सीरीज आजादी की लड़ाई को केवल कुछ प्रसिद्ध चेहरों तक सीमित न रखकर उन क्रांतिकारियों की कहानी सामने लाने की कोशिश करती है, जिन्होंने अपने जीवन और रिश्तों की कीमत पर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।
कुल मिलाकर, ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी के संघर्ष के एक अलग पहलू को सामने लाने वाली ऐतिहासिक वेब सीरीज है। भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतिभा रांटा और गुरफतेह पीरजादा का अभिनय इसकी प्रमुख ताकत है, जबकि एडिटिंग और कुछ दोहराए गए हिस्से इसकी कमजोर कड़ियां नजर आती हैं। इसके बावजूद विषय और प्रस्तुति के कारण यह सीरीज इतिहास और क्रांतिकारी कहानियों में रुचि रखने वाले दर्शकों को आकर्षित कर सकती है।

प्रतिक्रियाएँ
Monika Das

Monika Das

7 घंटे पहले

Yeh show sach mein zabardast hai, sabko dekhna chahiye.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

8 घंटे पहले

Celebrity ki yeh baat sun ke haiaran reh gaye.

Neel Saxena

Neel Saxena

9 घंटे पहले

Fans ka reaction toh dekhne wala hoga!

Anika Rajput

Anika Rajput

11 घंटे पहले

Filmi duniya ka yeh drama khatam hone wala nahi.

Pranav Srivastava

Pranav Srivastava

12 घंटे पहले

Entertainment duniya mein naya chapter shuru ho gaya.

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