चिरैया Review: दमदार मुद्दा लेकिन फीकी प्रस्तुति

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चिरैया एक 6 एपिसोड की वेब सीरीज है, जो जियो हॉटस्टार पर रिलीज होते ही चर्चा में आ गई। इस सीरीज में दिव्या दत्ता कमलेश के किरदार में नजर आती हैं—एक आदर्श बहू, जिसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसकी देवरानी पूजा अपने पति पर मैरिटल रेप का आरोप लगाती है।
कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे रिश्तों की सच्चाई कुछ और ही होती है।
मैरिटल रेप: एक सेंसिटिव मुद्दा, जिस पर बंटी राय
सीरीज का मुख्य फोकस मैरिटल रेप और ‘कंसेंट’ जैसे संवेदनशील विषय पर है। यह वही मुद्दा है, जिस पर भारतीय समाज में आज भी खुलकर चर्चा नहीं होती।
एक वर्ग इसे जरूरी और साहसी कदम बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे अतिरंजित या एकतरफा कहानी मान रहा है, सोशल मीडिया पर कुछ सीन मीम्स का हिस्सा भी बन गए हैं, जो समाज की सोच पर सवाल खड़े करते हैं।
कहां रह गई कमी?
सीरीज का विषय जितना मजबूत है, उसकी प्रस्तुति उतनी ही कमजोर नजर आती है।
1. धीमी और खिंची हुई कहानी : 6 एपिसोड की यह सीरीज कई जगहों पर जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती है। इसे 2 घंटे की फिल्म के रूप में ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता था।
2. इमोशनल इम्पैक्ट की कमी : सीन्स को इस तरह गढ़ा गया है कि सिहरन पैदा हो, लेकिन कई जगह यह प्रभाव “ठंडी चाय” जैसा लगता है—भावनाएं गहराई तक नहीं पहुंच पातीं।
3. एकतरफा किरदार चित्रण : पुरुष किरदारों को एक ही नजरिए से दिखाया गया है, जिससे कहानी संतुलित नहीं लगती।
दिव्या दत्ता का प्रदर्शन कैसा रहा?
दिव्या दत्ता एक अनुभवी और दमदार अभिनेत्री हैं, लेकिन इस सीरीज में उनका किरदार उतना प्रभावशाली नहीं बन पाया जितनी उनसे उम्मीद थी।
उन्होंने मुद्दे को उठाया जरूर, लेकिन स्क्रीन प्रेजेंस और भावनात्मक पकड़ थोड़ी कमजोर रही, यह किरदार “मजबूत मुद्दा, कमजोर प्रस्तुति” का उदाहरण बनकर रह गया।
समाज पर बड़ा सवाल
सीरीज यह सवाल उठाती है— क्या शादी के बाद स्त्री की ‘ना’ का कोई मतलब नहीं?
यह दिखाती है कि कैसे: पारिवारिक परंपराएं कई बार अन्याय को सामान्य बना देती हैं, महिलाएं भी उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाती हैं, और सच अक्सर घर की चारदीवारी में दबा रह जाता है |
OTT पर बहस क्यों छिड़ी?
चिरैया सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि एक बहस बन चुकी है।
सोशल मीडिया पर #MaritalRape ट्रेंड करने लगा,
कुछ लोग इसे “रियलिटी चेक” कह रहे हैं,
तो कुछ इसे “ओवरड्रामेटिक” बता रहे हैं,
यही विभाजन इस बात का संकेत है कि समाज अभी भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं है।
देखें या नहीं?
अगर आप कंटेंट में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर सोचने वाली कहानियां देखना पसंद करते हैं— तो चिरैया एक बार जरूर देखें।
हालांकि, अगर आप तेज रफ्तार और ग्रिपिंग स्टोरी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह आपको थोड़ा निराश कर सकती है।




