मोदी कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: राष्ट्रीय गीत के सम्मान पर सख्त कानून की तैयारी

Krishna Yadav
5 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Rohan Desai
7 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Taushif Shekh
8 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Priya Iyer
9 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Shruti Bajpai
9 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Payal jadon
13 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के सम्मान और संरक्षण को लेकर एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब “वंदे मातरम” को भी वही कानूनी सुरक्षा मिलेगी, जो वर्तमान में राष्ट्रगान “जन गण मन” को प्राप्त है।
अब वंदे मातरम का अपमान होगा दंडनीय अपराध
सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर “वंदे मातरम” के गायन में बाधा डालता है, उसका अपमान करता है या उसे विकृत रूप में प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संशोधन लागू होने के बाद दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा के रूप में दिए जा सकते हैं।
अब तक इस अधिनियम के तहत केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर ही कार्रवाई का प्रावधान था। लेकिन नए बदलाव के बाद राष्ट्रीय गीत को भी समान दर्जा और संरक्षण मिलेगा।
बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को मिला नया सम्मान
“वंदे मातरम” की रचना महान साहित्यकार Bankim Chandra Chattopadhyay ने की थी। यह गीत लंबे समय से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवाद का प्रतीक माना जाता रहा है। सरकार का कहना है कि यह कदम भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने और राष्ट्रीय भावनाओं को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
अनुराग ठाकुर ने फैसले का किया स्वागत
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद Anurag Thakur ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे करोड़ों देशवासियों के सम्मान और गौरव से जुड़ा कदम बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री Amit Shah का आभार जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से “वंदे मातरम” को कानूनी संरक्षण देने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ होने वाले जानबूझकर अपमान और सांस्कृतिक हमलों पर रोक लगेगी।
सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल
गृह मंत्रालय ने इसी वर्ष जनवरी में “वंदे मातरम” के गायन को लेकर नया प्रोटोकॉल भी जारी किया था। इसके अनुसार सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में इसकी छह पंक्तियों का गायन किया जाएगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
निर्देशों के मुताबिक: जहां राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों होंगे, वहां पहले “वंदे मातरम” गाया जाएगा।
राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राष्ट्रीय समारोहों में इसके दौरान सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा। सरकारी कार्यक्रमों में इसके निर्धारित प्रारूप का पालन किया जाएगा।
बंगाल चुनाव के बाद फैसले के राजनीतिक मायने
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव अभियान के दौरान भाजपा ने “वंदे मातरम” को राष्ट्रवाद और बंगाली अस्मिता का बड़ा प्रतीक बनाया था। ऐसे में नई कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया यह निर्णय राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
150वीं वर्षगांठ पर सरकार का बड़ा संदेश
देश इस समय “वंदे मातरम” की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे मौके पर मोदी सरकार का यह कदम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को मजबूत करने वाला बड़ा संदेश माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे राष्ट्रीय गीत को लेकर लोगों में जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होगी।







