DU में ‘मर्यादा’ बनाम ‘विरोध’ की जंग: छात्रा की ‘रील्स’ से मचा बवाल
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Delhi University (डीयू) इन दिनों गंभीर विवादों के केंद्र में है। एक ओर UGC कानून को लेकर छात्र संगठनों का विरोध, दूसरी ओर एक महिला यूट्यूबर के साथ कथित बदसलूकी और अब एक छात्रा द्वारा प्रोफेसर पर उत्पीड़न के आरोप—इन सबने यूनिवर्सिटी परिसर का माहौल गर्मा दिया है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए कैंपस में 1 महीने के लिए ‘प्रोटेस्ट बैन’ लागू कर दिया है।
महिला यूट्यूबर से बदसलूकी: क्या थी साजिश?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला यूट्यूबर के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई की घटना सामने आई। आरोप है कि लेफ्ट विंग से जुड़े कुछ छात्रों ने उन्हें पकड़कर बदसलूकी की। महिला यूट्यूबर ने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। सवाल उठ रहे हैं—
क्या यह सुनियोजित हमला था?
क्या उनकी रिपोर्टिंग कुछ संगठनों को असहज कर रही थी?
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
छात्रा “चित्रा” का गंभीर आरोप: प्रोफेसर ने किया मानसिक उत्पीड़न?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की MA (African Studies) प्रथम वर्ष की छात्रा “चित्रा” (परिवर्तित नाम) ने अपने विभाग के एक प्रोफेसर पर उत्पीड़न और मानसिक दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा ने इंस्टाग्राम पर एक रील साझा की, जिसमें उसने पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया।
छात्रा का आरोप:
प्रोफेसर ने उसे अपने कमरे में बुलाने का दबाव बनाया। विभागाध्यक्ष (HOD) ने भी प्रोफेसर के कमरे में जाने को कहा। मना करने पर कथित रूप से धमकी दी गई — “तुम इस यूनिवर्सिटी का बहुत छोटा सा हिस्सा हो, हम तुम्हारा बहुत कुछ बिगाड़ सकते हैं।” छात्रा का दावा है कि उस पर वीडियो डिलीट करने का भी दबाव बनाया गया, लेकिन उसने साफ इनकार कर दिया।
DU प्रशासन का पक्ष
डीयू प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है और मामला भ्रामक हो सकता है। हालांकि, विश्वविद्यालय की साख पर सवाल उठ रहे हैं। जांच कमेटी की रिपोर्ट और कार्रवाई को लेकर भी पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है।
ABVP की मांग: निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो
Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (एबीवीपी) ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। एबीवीपी का कहना है कि: सच्चाई सामने लाई जाए, छात्रा को न्याय मिले, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, साथ ही संगठन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रही हैं।
UGC कानून पर विरोध और ‘प्रोटेस्ट बैन’
UGC कानून को लेकर भी कैंपस में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। प्रशासन का कहना है कि बढ़ते तनाव और हालिया घटनाओं को देखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक महीने का ‘प्रोटेस्ट बैन’ लगाया गया है। छात्र संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
बड़े सवाल जो उठ रहे हैं
क्या छात्रा पर वाकई दबाव बनाया गया?
क्या महिला यूट्यूबर के साथ बदसलूकी सुनियोजित थी?
क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन निष्पक्ष जांच कर पाएगा?
क्या ‘प्रोटेस्ट बैन’ से हालात सुधरेंगे या और बिगड़ेंगे?
सोशल मीडिया पर ट्रेंड
यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। छात्र, पूर्व छात्र और राजनीतिक संगठन खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी, जिसे देश की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में गिना जाता है, आज आरोपों और विरोध के दोराहे पर खड़ी है।
यदि आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है।
यदि आरोप भ्रामक हैं, तो भी पारदर्शी जांच जरूरी है।
सवाल सिर्फ एक छात्रा या एक यूट्यूबर का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की गरिमा और छात्र सुरक्षा का है।

