छोटी जगह, बड़ा कमाल: सूरत के प्रणय सोलंकी ने 1.5 फीट के कमरे में उगाया ‘लाल सोना’

गुजरात के सूरत निवासी प्रणय सोलंकी ने आधुनिक खेती की दुनिया में एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने एरोपॉनिक तकनीक (Aeroponic Technique) की मदद से महज़ 1.5 फीट के छोटे से कमरे में कश्मीर के पंपोर जैसा तापमान और माहौल तैयार कर घर पर ही केसर उगाने में सफलता हासिल की है।
यह उपलब्धि न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सीमित जगह में भी उच्च मूल्य वाली खेती संभव है।
कैसे बनाया ‘पंपोर’ जैसा माहौल?
केसर की खेती के लिए विशेष तापमान, आर्द्रता और प्रकाश की आवश्यकता होती है, जैसा कि जम्मू-कश्मीर के पंपोर क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से मिलता है। प्रणय सोलंकी ने अपने हाई-टेक सेटअप में, नियंत्रित तापमान प्रणाली, आर्द्रता (Humidity) कंट्रोल, कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था, पोषक तत्वों का फाइन स्प्रे सिस्टम, का उपयोग किया। एरोपॉनिक तकनीक में मिट्टी की जरूरत नहीं होती, बल्कि पौधों की जड़ों को हवा में लटकाकर पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है। इससे पानी की बचत होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।
हर चक्र में 1 किलो केसर, कीमत ₹5.5 लाख!
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रणय सोलंकी के इस इनडोर सेटअप से हर चक्र में लगभग 1 किलो केसर तैयार होता है। बाजार में केसर की कीमत करीब ₹5.5 लाख प्रति किलो बताई जा रही है। इस हिसाब से यह मॉडल छोटे स्तर पर भी उच्च आय का बड़ा स्रोत बन सकता है। केसर को ‘लाल सोना’ कहा जाता है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे महंगी मसालों में से एक है।
युवाओं के लिए स्टार्टअप का नया मॉडल
प्रणय सोलंकी की यह पहल युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन सकती है। शहरी इलाकों में जहां जमीन की कमी है, वहां एरोपॉनिक और हाइड्रोपॉनिक जैसी तकनीकें कृषि को नई दिशा दे सकती हैं।
कम जगह में अधिक उत्पादन, पानी की बचत, नियंत्रित और गुणवत्तापूर्ण फसल, उच्च बाजार मूल्य, इन सभी कारणों से यह मॉडल भविष्य की स्मार्ट खेती का प्रतीक बन सकता है।
तकनीक और नवाचार से बदल रही खेती की तस्वीर
आज के दौर में पारंपरिक खेती के साथ-साथ स्मार्ट फार्मिंग तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। प्रणय सोलंकी का यह प्रयोग साबित करता है कि अगर सोच नई हो और तकनीक का सही उपयोग किया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
यह पहल “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में भी एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
सूरत के प्रणय सोलंकी ने दिखा दिया कि खेती सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है। आधुनिक तकनीक, नवाचार और जुनून के साथ घर के छोटे से कमरे में भी लाखों की फसल उगाई जा सकती है।
उनकी यह उपलब्धि देशभर के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
