भारत-अमेरिका के बीच बड़ा रक्षा समझौता: सेना को मिलेंगी जैवलिन मिसाइलें

Taushif Shekh
2 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ada khan
2 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Nisha Shah
7 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Aarohi Chaudhary
7 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Taushif Shekh
7 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Dhruv Bhatt
11 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Anika Rajput
11 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
भारत और अमेरिका के बीच करीब ₹292 करोड़ का महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारतीय सेना के लिए अमेरिका से अत्याधुनिक जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें खरीदी जाएंगी। यह सौदा सरकार-से-सरकार यानी G2G व्यवस्था के तहत किया गया है। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे सहयोग के बीच इस समझौते को अहम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना की टैंक रोधी क्षमता को और मजबूत करना है। इस डील से सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सेना को मिलेंगी करीब 60 जैवलिन मिसाइलें
रक्षा समझौते के तहत भारतीय सेना को शुरुआती तौर पर करीब 60 जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें और उनके कमांड लॉन्च यूनिट मिलने की जानकारी है। इन मिसाइलों को विशेष रूप से दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। जैवलिन प्रणाली को सैनिकों के लिए उपयोग में आसान और प्रभावी एंटी-टैंक हथियार माना जाता है। इसकी तैनाती से पैदल सेना की टैंक रोधी क्षमता में बढ़ोतरी होगी। संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में ऐसी प्रणालियां सेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। इससे भारतीय सैनिकों को आधुनिक टैंक रोधी हथियारों की अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।
फायर एंड फॉरगेट तकनीक बनाती है खास
जैवलिन मिसाइल की सबसे प्रमुख विशेषताओं में इसकी फायर एंड फॉरगेट तकनीक शामिल है। इसका मतलब है कि लक्ष्य पर मिसाइल दागने के बाद ऑपरेटर को लगातार उसे नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती। मिसाइल अपने लक्ष्य को ट्रैक करते हुए आगे बढ़ सकती है और सैनिक अपनी स्थिति बदल सकता है। इस क्षमता के कारण इसे दुश्मन के टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ प्रभावी हथियार माना जाता है। जैवलिन में टॉप-अटैक क्षमता भी है, जिसके जरिए यह टैंक के अपेक्षाकृत कमजोर ऊपरी हिस्से को निशाना बना सकती है। यही तकनीकी विशेषताएं इसे आधुनिक एंटी-टैंक प्रणालियों में महत्वपूर्ण बनाती हैं।
आपातकालीन खरीद के तहत हुआ समझौता
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह रक्षा खरीद आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत की गई है। इसका उद्देश्य सेना की तत्काल जरूरतों को पूरा करना और सुरक्षा चुनौतियों के बीच उसकी परिचालन क्षमता को मजबूत करना है। हालिया सैन्य परिस्थितियों के बाद भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया है। जैवलिन मिसाइलों की खरीद भी इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है। इससे सेना को टैंक रोधी हथियारों की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। आपातकालीन खरीद के जरिए जरूरी सैन्य उपकरणों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम समय में सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ेगी टैंक रोधी क्षमता
जैवलिन मिसाइलों की खरीद का सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमता को मजबूत करना है। पहाड़ी और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों से निपटने के लिए ऐसी मिसाइल प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारतीय सेना पहले से ही स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियों को विकसित और शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। इसके बावजूद तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी प्रणालियों की खरीद भी की जा रही है। नई जैवलिन प्रणालियां पैदल सेना की मौजूदा क्षमताओं में अतिरिक्त मजबूती जोड़ सकती हैं। इससे संभावित सुरक्षा चुनौतियों के सामने सेना की तैयारियों को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा
यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत हो रही रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को भी दर्शाता है। दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में सैन्य सहयोग, रक्षा तकनीक और सुरक्षा साझेदारी के कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। जैवलिन मिसाइलों की खरीद से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत होने की संभावना है। भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए आधुनिक हथियार प्रणालियों के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर भी जोर दे रहा है। ऐसे समझौते तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। आने वाले समय में भारत-अमेरिका के बीच रक्षा तकनीक और सैन्य सहयोग के और विस्तार की संभावना बनी हुई है।








