अंगदान में भारत ने बनाया नया इतिहास: ऑर्गन ट्रांसप्लांट में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर

Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Anjali Patil
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Monika Das
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain!
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain!
भारत ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 में पहली बार एक ही वर्ष में 20,138 अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplants) का रिकॉर्ड बनाया है। इस उपलब्धि के साथ भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अंग प्रत्यारोपण करने वाला देश बन गया है। 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने यह जानकारी साझा की। पिछले एक दशक में देश में अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जिससे हजारों मरीजों को नया जीवन मिला है।
12 वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़े अंग प्रत्यारोपण
भारत में अंग प्रत्यारोपण की संख्या में पिछले 12 वर्षों के दौरान अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013 में जहां कुल 4,990 प्रत्यारोपण हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 20,138 तक पहुंच गई। यह स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, जागरूकता अभियान और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का परिणाम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि देश की ट्रांसप्लांट प्रणाली के लगातार मजबूत होने का संकेत है।
2024 की तुलना में 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में 18,911 अंग प्रत्यारोपण किए गए थे। इसके मुकाबले 2025 में यह संख्या बढ़कर 20,138 हो गई, जो लगभग 6.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि को दर्शाती है। लगातार बढ़ते प्रत्यारोपण यह संकेत देते हैं कि अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता और भरोसा दोनों बढ़ रहे हैं।
जीवित दाताओं के अंगदान में भारत दुनिया में नंबर-1
कुल प्रत्यारोपण के मामले में भारत भले ही तीसरे स्थान पर पहुंचा हो, लेकिन जीवित दाताओं (Living Donors) से होने वाले अंग प्रत्यारोपण में भारत आज भी दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीं मृतक अंगदाताओं (Deceased Donors) की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2013 में जहां केवल 837 मृतक अंगदान दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,526 तक पहुंच गया।
दिल्ली-एनसीआर सबसे आगे, तमिलनाडु बना अंगदान का सिरमौर
राज्यवार प्रदर्शन में दिल्ली-एनसीआर ने सबसे अधिक 4,564 अंग प्रत्यारोपण के साथ पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद तमिलनाडु और महाराष्ट्र का स्थान रहा। वहीं मृतक अंगदान के मामले में तमिलनाडु 266 दाताओं के साथ पूरे देश में शीर्ष पर रहा। महाराष्ट्र और तेलंगाना ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
डिजिटल अभियान और नई नीति से मिली बड़ी सफलता
सरकार के 'जुग जुग जियो' अभियान और राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल के माध्यम से वर्ष 2023 से अब तक 5 लाख से अधिक नागरिक आधार-सत्यापित अंगदान की शपथ ले चुके हैं। इसके अलावा 'ई-प्रत्यारोपण (e-Pratyaropan) पोर्टल' और 'एक राष्ट्र, एक नीति (One Nation, One Policy)' जैसी नई व्यवस्थाओं ने प्रत्यारोपण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सुगम बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से जागरूकता बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में भारत अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में और मजबूत कदम बढ़ा सकता है।







