बहुविवाह पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: मुस्लिम बहुविवाह पर केंद्र से जवाब

मुस्लिम बहुविवाह पर केंद्र से जवाब
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Anika Rajput

Anika Rajput

0 सेकंड पहले

Yeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

0 सेकंड पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

0 सेकंड पहले

Logon ki madad karna hi asli dharam hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

0 सेकंड पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Monika Das

Monika Das

0 सेकंड पहले

Hum is cause ke saath hain!

Diya Gupta

Diya Gupta

0 सेकंड पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

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मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह (पॉलिगैमी) की प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम सुनवाई की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने केंद्र से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। यह मामला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और समानता से जुड़ा महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न माना जा रहा है। अगली सुनवाई में केंद्र का पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा। इस मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।


मुस्लिम महिला संगठन ने उठाई पूर्ण प्रतिबंध की मांग
यह जनहित याचिका महिला अधिकार कार्यकर्ता जाकिया सोमन और भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (BMMA) की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बहुविवाह की प्रथा महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। उन्होंने अदालत से मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह की अनुमति को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। याचिका में महिलाओं की गरिमा, समानता और आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन का कहना है कि आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रथा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इसी आधार पर कानूनी सुधार की मांग की गई है।


सभी नागरिकों पर समान कानून लागू करने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की द्विविवाह (Bigamy) संबंधी धारा सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू की जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि धर्म के आधार पर अलग-अलग वैवाहिक नियम समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने मुस्लिम विवाह और तलाक के अनिवार्य सरकारी पंजीकरण की भी मांग की है। उनका कहना है कि इससे गुप्त बहुविवाह की घटनाओं पर रोक लगेगी। साथ ही विवाह संबंधी विवादों में महिलाओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

 

पीड़ित महिलाओं के अधिकारों की भी उठी मांग
याचिका में बहुविवाह से प्रभावित महिलाओं के लिए विशेष सरकारी सहायता व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है। इसमें पहली और दूसरी पत्नी दोनों के भरण-पोषण, संपत्ति में हिस्सेदारी और आवास के अधिकार सुनिश्चित करने की बात कही गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई महिलाएं आर्थिक और सामाजिक शोषण का शिकार होती हैं। ऐसे मामलों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने की भी मांग की गई है। उनका मानना है कि इससे पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल सकेगा।


केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। केंद्र के जवाब के बाद अदालत यह तय करेगी कि इस मामले में आगे किस प्रकार की संवैधानिक सुनवाई होगी। यह मामला व्यक्तिगत कानून, धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों से जुड़ा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की सुनवाई का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। सभी पक्षों के तर्कों के बाद ही अदालत अंतिम निर्णय की दिशा तय करेगी।


देशभर में शुरू हुई नई कानूनी बहस
इस याचिका के बाद बहुविवाह, समान नागरिक अधिकार और मुस्लिम महिलाओं की कानूनी सुरक्षा को लेकर देशभर में नई बहस शुरू हो गई है। महिला अधिकार संगठनों ने इसे लैंगिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है, जबकि इस विषय पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी पक्ष पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है। मामले की सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला भविष्य की सुनवाई के बाद ही आएगा। अदालत के निर्णय का असर व्यक्तिगत कानूनों और महिला अधिकारों से जुड़े व्यापक कानूनी विमर्श पर पड़ सकता है।

 

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Yeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.

Vaishali shinde

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Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Myra Dubey

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Aise logon ko support karna humara farz hai.

Pihu Agarwal

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Myra Dubey

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Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Monika Das

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Diya Gupta

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Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

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