अब नहीं चलेगी रिकवरी एजेंटों की मनमानी: RBI ने कर्जदारों को दिए नए अधिकार

Simran Arora
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लोन और लोन रिकवरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक मास्टर डायरेक्शन जारी किए हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को डिजिटल लोन ऐप्स, रिकवरी एजेंटों और अनैतिक वसूली प्रक्रियाओं से सुरक्षा प्रदान करना है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल लेंडिंग से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया नियामकीय मानकों के अनुरूप और ग्राहक हितों को प्राथमिकता देने वाली होनी चाहिए।
लोन राशि सीधे बैंक खाते में, निजी डेटा पर रहेगा पूरा नियंत्रण
नई गाइडलाइंस के अनुसार अब लोन की राशि सीधे ग्राहक के बैंक खाते में ट्रांसफर होगी और ईएमआई या भुगतान भी सीधे बैंक खाते के माध्यम से ही किया जाएगा। किसी भी प्रकार के पूल अकाउंट या थर्ड पार्टी वॉलेट के उपयोग पर रोक रहेगी। साथ ही डिजिटल लोन ऐप्स ग्राहकों की कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग, फोटो गैलरी या निजी फाइलों तक बिना आवश्यकता पहुंच नहीं बना सकेंगे। कैमरा और लोकेशन जैसी अनुमति केवल आवश्यक KYC प्रक्रिया के लिए ही सीमित रहेगी।
KFS और Cooling-Off Period से बढ़ेगी पारदर्शिता
आरबीआई ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक ग्राहक को लोन स्वीकृत होने से पहले Key Fact Statement (KFS) देना अनिवार्य होगा। इसमें ब्याज दर, APR, प्रोसेसिंग फीस, EMI, विलंब शुल्क और अन्य सभी शुल्क स्पष्ट रूप से बताए जाएंगे। इसके साथ ग्राहकों को एक निश्चित Cooling-Off Period भी मिलेगा, जिसके दौरान वे बिना अतिरिक्त दंड के लोन बंद कर सकेंगे। इससे ग्राहकों को जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों पर पुनर्विचार का अवसर मिलेगा।
रिकवरी एजेंटों के लिए सख्त आचार संहिता लागू
आरबीआई ने रिकवरी एजेंटों के व्यवहार पर भी कड़ी पाबंदियां लगाई हैं। अब एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही ग्राहकों से संपर्क कर सकेंगे। देर रात या सुबह-सुबह फोन कर मानसिक दबाव बनाने पर रोक रहेगी। किसी भी ग्राहक को डराना, धमकाना, गाली देना, सोशल मीडिया पर बदनाम करना या रिश्तेदारों के माध्यम से उत्पीड़न करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। प्रत्येक एजेंट के पास अधिकृत पहचान पत्र और बैंक का ऑथराइजेशन लेटर होना अनिवार्य रहेगा।
मोबाइल लॉक करने पर रोक, देरी पर मिलेगा मुआवजा
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पर्सनल, होम या कार लोन की ईएमआई बकाया होने पर बैंक या रिकवरी एजेंट ग्राहक के मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप को रिमोटली लॉक नहीं कर सकते। यदि मोबाइल खरीदने के लिए दिए गए विशेष डिवाइस लोन में भुगतान पूरा होने के बाद भी फोन अनलॉक करने में देरी होती है, तो बैंक को ग्राहक को ₹250 प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी।
बैंक और NBFC होंगे पूरी तरह जिम्मेदार
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी डिजिटल लोन ऐप, लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (LSP) या थर्ड पार्टी रिकवरी एजेंसी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसकी अंतिम कानूनी जिम्मेदारी संबंधित बैंक या NBFC की होगी। सभी रिकवरी एजेंटों के लिए IIBF से प्रशिक्षण और प्रमाणन भी अनिवार्य किया गया है। इन नियमों का उद्देश्य डिजिटल लेंडिंग क्षेत्र में ग्राहकों का भरोसा मजबूत करना और वित्तीय व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाना है।







