MP Liquor Scam: सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट का बड़ा झटका

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मध्य प्रदेश में कथित MP Liquor Scam को लेकर एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब निर्माता कंपनी Som Distilleries को बड़ा झटका देते हुए उनके 8 लाइसेंस निलंबन के फैसले को बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख
जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट कहा कि शराब का व्यापार करना कोई मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है। यह पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन होता है, तो आबकारी विभाग किसी भी समय कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

फर्जी परमिट का गंभीर मामला
यह पूरा विवाद शराब के अवैध परिवहन में फर्जी परमिट (forged permits) के इस्तेमाल से जुड़ा है। आबकारी विभाग ने वर्ष 2024 में कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी किया था, जिसमें नियमों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे। जांच के बाद 4 फरवरी 2026 को कंपनी के 8 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे।

‘एक्सपायरी डेट’ का तर्क नहीं चला
Som Distilleries ने कोर्ट में दलील दी थी कि 2024 का नोटिस पुराने लाइसेंस से जुड़ा था, जिसकी वैधता 31 मार्च 2024 को समाप्त हो चुकी थी।
लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा: “शो-कॉज नोटिस की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।” नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई कभी भी की जा सकती है।

आबकारी विभाग को मिला पूरा अधिकार
हाईकोर्ट ने माना कि आबकारी विभाग (Excise Department) ने मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर कार्रवाई की है। कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस निलंबन का निर्णय पूरी तरह कानूनी, उचित और न्यायसंगत है।

शराब माफिया पर सख्ती का संकेत
यह फैसला राज्य में शराब माफिया और अवैध कारोबार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि शराब से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।

क्या बोले जस्टिस विवेक अग्रवाल?
सुनवाई के दौरान जस्टिस अग्रवाल ने कहा:
शराब व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है,
नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध है,
देरी से की गई कार्रवाई भी पूरी तरह वैध है,

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं—चाहे वह बड़ी कंपनी ही क्यों न हो। शराब व्यापार जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों का पालन अनिवार्य है और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई तय है।

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