कटनी में 163 बच्चों का मामला गरमाया: मानव तस्करी या गलतफहमी

मानव तस्करी या गलतफहमी

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मध्य प्रदेश के कटनी जिले में 163 नाबालिग बच्चों से जुड़ा मामला अब बड़ा विवाद बन गया है। शुरुआत में Government Railway Police (GRP) और Railway Protection Force (RPF) ने इन बच्चों को पटना-पूर्णा एक्सप्रेस ट्रेन से रोककर मानव तस्करी के शक में जांच शुरू की थी। अब इस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं और मामला नया मोड़ ले चुका है।

ट्रेन से बच्चों को उतारकर शुरू हुई जांच
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात कटनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर संयुक्त अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर ट्रेन की तलाशी ली और 6 से 13 वर्ष की आयु के 163 बच्चों को ट्रेन से सुरक्षित उतारा। अभियान रात भर चला और रविवार सुबह तक जारी रहा।

8 लोगों को हिरासत में लिया गया
बच्चों के साथ यात्रा कर रहे 8 व्यक्तियों को वैध टिकट और जरूरी दस्तावेज नहीं होने के कारण हिरासत में लिया गया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो नाबालिगों की तस्करी से जुड़ा प्रावधान है।

पुलिस का दावा- मजदूरी के लिए ले जाए जा रहे थे बच्चे
आरपीएफ कटनी के इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चों को बिहार के अररिया और आसपास के इलाकों से महाराष्ट्र के लातूर जिले में मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था। इसी आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई की।

बिहार से पहुंचे परिजनों ने उठाए सवाल
मंगलवार को बिहार के अररिया समेत कई जिलों से बच्चों के परिजन कटनी जीआरपी थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस के मानव तस्करी वाले आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। परिजनों का कहना है कि बच्चों को गलतफहमी में रोका गया और वे किसी भी तरह के अवैध नेटवर्क का हिस्सा नहीं हैं।

बच्चों की काउंसलिंग और पहचान सत्यापन जारी
बाल संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी ने बताया कि सभी बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है। परिवारों से संपर्क कर पहचान, यात्रा का उद्देश्य और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कुछ बच्चों को कटनी की बाल संरक्षण इकाइयों में रखा गया है, जबकि अन्य को जबलपुर भेजा गया है।

सुरक्षा और संवेदनशीलता के बीच बहस
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं, लेकिन निर्दोष परिवारों को परेशान होने से कैसे बचाया जाए। अब सभी की नजरें प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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