रीवा में न्याय की मांग पर बड़ा विरोध: जेपी कुशवाह के नेतृत्व में प्रदर्शन

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जेपी कुशवाह के नेतृत्व में प्रदर्शन

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रीवा (मध्य प्रदेश) में सेन परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवारों के समर्थन में चल रहे आंदोलन के दौरान करीब 100 लोगों ने अपनी शिखा काटकर हिंदू धर्म त्यागने की घोषणा कर दी। इस प्रदर्शन का नेतृत्व जेपी कुशवाह कर रहे हैं।
यह प्रदर्शन रीवा कलेक्टर कार्यालय के सामने आयोजित किया गया, जहां सैकड़ों लोग सेन परिवार के समर्थन में इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

सेन परिवार के समर्थन में सड़कों पर उतरा समाज
जानकारी के मुताबिक, नंदवंशी सेन समाज के कुछ परिवारों के घरों को कथित तौर पर दबंगों द्वारा अवैध अतिक्रमण के बाद तोड़ दिया गया। इससे कई परिवार बेघर हो गए।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि घटना के बाद उन्होंने प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से मदद की मांग की, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला। इसी के विरोध में समाज के लोगों ने रीवा कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया।

शिखा काटकर हिंदू धर्म त्यागने की घोषणा
आंदोलन के दौरान विरोध का एक बेहद प्रतीकात्मक और विवादित कदम सामने आया। करीब 100 लोगों ने एक साथ अपनी शिखा काटकर हिंदू धर्म त्यागने की घोषणा कर दी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब किसी समाज को न्याय नहीं मिलता, तो उसकी आस्था और विश्वास भी कमजोर हो जाते हैं। उनका कहना था कि यह कदम सरकार और प्रशासन को जगाने के लिए उठाया गया है।

भाजपा सरकार पर उठे सवाल
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो सरकार लगातार हिंदू हितों की बात करती है, वही सरकार आज पीड़ित हिंदू परिवारों को न्याय देने में असफल नजर आ रही है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया: “क्या यही वह सरकार है जो हिंदू-हिंदू की बात करती है?”

आंदोलन उग्र होने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सेन परिवार को न्याय और पुनर्वास नहीं मिला, तो आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ लोग इस कदम को न्याय के लिए मजबूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अत्यधिक भावनात्मक और विवादित विरोध करार दे रहे हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा मामले की जांच और स्थिति की समीक्षा की बात कही जा रही है।

रीवा में सेन समाज द्वारा उठाया गया यह कदम सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। न्याय की मांग, धार्मिक पहचान और राजनीतिक आरोपों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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