शहडोल में ‘मौत के कुएं’ बन रहीं अवैध कोयला खदानें: करोड़ों के काले कारोबार की कीमत जान देकर चुका रहे मजदूर

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मध्य प्रदेश के शहडोल और उससे सटे अनूपपुर जिले में सोन नदी के किनारे चल रहा अवैध कोयला खनन एक बार फिर सुर्खियों में है। बुढ़ार, अमलाई, जैतपुर, धनपुरी और केशवाही क्षेत्रों में 20 से अधिक अवैध खदानें, जिन्हें स्थानीय लोग "मौत के कुएं" कहते हैं, धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। इन खदानों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं, जिसके चलते आए दिन हादसे होते हैं और मजदूर अपनी जान गंवा रहे हैं।
पति-पत्नी की मौत ने उजागर किया अवैध खनन का खतरनाक सच
हाल ही में बुढ़ार थाना क्षेत्र के धनगावन गांव के पास सोन नदी किनारे अवैध खनन के दौरान मिट्टी धंसने से ओंकार यादव (40) और उनकी पत्नी पार्वती यादव (36) की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों कोयले की तलाश में खुदाई कर रहे थे, तभी मिट्टी का बड़ा हिस्सा उन पर आ गिरा। घंटों बाद जेसीबी मशीनों की मदद से दोनों के शव बाहर निकाले गए।
इस हादसे के बाद उनकी 2 से 18 वर्ष की उम्र की पांच बेटियां बेसहारा हो गईं। परिवार पर दुखों का पहाड़ इसलिए भी टूटा क्योंकि छह महीने पहले ही उनका इकलौता बेटा रविंद्र यादव सांप के काटने से जान गंवा चुका था।
कैसे चलता है करोड़ों रुपये का अवैध कोयला कारोबार?
जानकारों के अनुसार सोन नदी के किनारे की मिट्टी बेहद भुरभुरी है, जिसके कारण मात्र 10 से 15 फीट की खुदाई में ही कोयले की परत मिल जाती है। इसी आसान उपलब्धता का फायदा उठाकर कोल माफिया बड़े पैमाने पर अवैध खनन करवाते हैं।
स्थानीय गरीब ग्रामीणों को मामूली मजदूरी देकर खदानों में उतारा जाता है। मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर कोयला निकालते हैं, जबकि माफिया उसी कोयले को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर हर महीने करोड़ों रुपये का काला कारोबार खड़ा करते हैं। एक बोरी कोयले की कीमत लगभग 200 रुपये तक मिल जाती है, जिससे यह अवैध धंधा लगातार फल-फूल रहा है।
‘मौत के कुएं’ क्यों कहलाती हैं ये खदानें?
अवैध खदानों में न तो सुरक्षा मानकों का पालन होता है और न ही किसी प्रकार की तकनीकी निगरानी होती है। संकरी और गहरी खुदाई के कारण मिट्टी धंसने का खतरा हमेशा बना रहता है। कई बार मजदूर जिंदा दफन हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक मजबूरी के चलते ग्रामीण इस जोखिम भरे काम को करने के लिए मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन खदानों से न केवल मानव जीवन खतरे में पड़ रहा है, बल्कि पर्यावरण और भूगर्भीय संरचना को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
प्रशासन की जांच और टास्क फोर्स की तैयारी
शहडोल के पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह जांच की जा रही है कि अवैध खनन किसके संरक्षण में चल रहा था। जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के साथ घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सोन नदी क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस हादसे के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अवैध खनन माफिया को संरक्षण मिलने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का भविष्य दांव पर
स्थानीय लोगों का कहना है कि तात्कालिक आर्थिक लाभ और लालच के कारण क्षेत्र के कुछ लोग खुद ही इस अवैध कारोबार का हिस्सा बन चुके हैं। इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है। सोन नदी का पर्यावरण, जमीन की संरचना और ग्रामीणों की सुरक्षा लगातार खतरे में है, लेकिन अवैध खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

