मदरसे या ‘आतंक’ की पाठशाला? : अबू आसिम आजमी ने दी खुली चुनौती

2 दिन पहले628
🚚

फ्री होम डिलीवरी

₹0

विज्ञापन
अबू आसिम आजमी ने दी खुली चुनौती

स्मार्टवॉच ऑफर

₹2,999

विज्ञापन

महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राज्य के बंदरगाह विकास मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने मदरसों को लेकर विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि “मदरसों में कट्टरपंथी और आतंकवादी तैयार होते हैं” और राज्य में सभी मदरसों को बंद करने की मांग करने की बात कही।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

क्या बोले नितेश राणे?
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राणे ने कहा: “मदरसों की जरूरत ही क्यों है? ये आतंकवाद के गढ़ बन चुके हैं। यहीं आतंकवादी तैयार होते हैं।” उन्होंने सावंतवाड़ी का एक कथित वायरल वीडियो का हवाला दिया, जिसमें एक मौलवी द्वारा छात्र की पिटाई का आरोप है। राणे ने कहा कि संबंधित मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राणे, जो सिंधुदुर्ग जिले के कणकवली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने यह भी कहा कि वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर राज्य के मदरसों को बंद करने की मांग करेंगे।

“मदरसों की जरूरत ही क्यों है?”
राणे ने अपने बयान में आगे कहा:
“अगर कुरान पढ़ाना है तो मस्जिदें हैं।”
“कभी-कभी मदरसों में हथियार मिलने की खबरें आती हैं।”
“क्या किसी इस्लामी देश में केवल भगवद गीता पढ़ाने वाले स्कूल की अनुमति है?”
उनके इन सवालों ने बहस को और तेज कर दिया है।

अबू आजमी की चुनौती
राणे के बयान पर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
आजमी ने कहा: “भारत के किसी भी मदरसे में आतंकवादी गतिविधि नहीं होती। अगर मंत्री चाहें तो सीसीटीवी कैमरे लगवा लें, खुद आकर रह लें। उन्हें कमरा और खाना दिया जाएगा। जांच कर लें—कुछ नहीं मिलेगा।”
आजमी ने इसे मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की कोशिश बताया और कहा कि मदरसे शिक्षा का केंद्र हैं, न कि किसी अवैध गतिविधि का।

सियासत क्यों गरमाई?
बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से बहस चल रही है। विपक्ष इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहा है। भाजपा के भीतर भी कुछ नेताओं ने बयान से दूरी बनाते हुए संयम बरतने की सलाह दी है 

कानूनी और सामाजिक पहलू
भारत में मदरसे संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के रूप में संरक्षित हैं। किसी भी संस्था को बंद करने के लिए ठोस कानूनी प्रक्रिया और प्रमाण आवश्यक होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कहीं कोई अवैध गतिविधि होती है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन समूचे संस्थागत ढांचे को एक साथ कटघरे में खड़ा करना विवाद को जन्म देता है।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड
राणे के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #MadrasaControversy और #NiteshRane जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। समर्थक और विरोधी—दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस जारी है।

महाराष्ट्र में मदरसों को लेकर छिड़ी यह बहस केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीति के जटिल समीकरणों को भी उजागर करती है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया और राज्य सरकार की आगे की रणनीति पर है। क्या यह बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है या किसी बड़े कदम की भूमिका? आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ हो सकती है।

🎧

हेडफोन्स सेल

₹1,499

विज्ञापन
📱

टैबलेट मेगा सेल

₹12,999

विज्ञापन
🏠

होम अप्लायंसेस

₹15,999

विज्ञापन