फिजूलखर्ची से बचने की पहल: एक ही मंडप में 14 शादियां एक साथ
Simran Arora
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
मध्य प्रदेश के सतना में एक किसान परिवार ने फिजूलखर्ची, दिखावे और कर्ज से बचने के लिए बड़ा और अनोखा फैसला लिया। परिवार ने अपने चाचा, ताऊ और मामा के बेटों को मिलाकर कुल 14 लड़कों की शादी एक ही मंडप में एक साथ तय की।इस पहल को समाज में सादगी और आर्थिक समझदारी की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
एक ही मंडप में हुआ भव्य लेकिन सादा आयोजन
सभी 14 शादियां एक ही मंडप में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराई गईं। परिवार ने भव्यता की जगह सादगी को प्राथमिकता दी और पूरे आयोजन को बेहद सरल रखा।ग्रामीणों और रिश्तेदारों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने इस सामूहिक विवाह को खास बना दिया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में आई अनोखी बारात
इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि किसी भी महंगी गाड़ियों की बुकिंग नहीं की गई। सभी 14 दूल्हे केवल 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर बारात लेकर पहुंचे।
बारात का यह सादगी भरा अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।
विदाई भी सादगी के साथ संपन्न
शादी समारोह के बाद विदाई भी बेहद साधारण तरीके से ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से ही कराई गई। किसी प्रकार की दिखावटी रस्मों से बचते हुए परिवार ने परंपरा और सादगी को प्राथमिकता दी।इस निर्णय को आर्थिक रूप से समझदारी भरा और सामाजिक संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है।
ग्रामीणों में चर्चा का विषय बनी शादी
इस अनोखे सामूहिक विवाह की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल आज के समय में बढ़ते खर्च और कर्ज के बोझ के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है।लोगों ने परिवार की इस सोच की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया है।
समाज को मिला सादगी का संदेश
यह सामूहिक विवाह केवल एक आयोजन नहीं बल्कि समाज के लिए एक संदेश बन गया है कि शादी जैसे आयोजनों में अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।
परिवार की यह पहल दिखावे की संस्कृति के खिलाफ एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में सामने आई है।

