संसद से सड़क तक ‘धमकी’ का साया: आरोपी निकला हिस्ट्रीशीटर
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राजस्थान की शिक्षा नगरी Kota से सामने आए एक सनसनीखेज वीडियो ने देशभर की राजनीति में हलचल मचा दी। वीडियो में एक युवक ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित 25 कांग्रेस सांसदों को घर में घुसकर गोली मारने की धमकी दी। वीडियो वायरल होते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।
कौन है आरोपी? आदतन अपराधी निकला राज आमेर
पुलिस जांच में आरोपी की पहचान राज आमेर (राजसिंह आमेरा) के रूप में हुई है। उसने खुद को करणी सेना का प्रवक्ता बताया था, हालांकि संगठन ने उससे किसी भी संबंध से इनकार कर दिया है। कोटा पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर पहले से ही 4 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस इसे “सिक्योरिटी ब्रीच” और सार्वजनिक शांति भंग करने का गंभीर मामला मान रही है।
‘घर में घुसकर गोली मारेंगे’ – वीडियो में खुली धमकी
वायरल वीडियो में आरोपी ने लोकसभा में हालिया हंगामे का जिक्र करते हुए राहुल गांधी को सीधे चेतावनी दी। उसने कहा— “अगर ऐसी घटना दोबारा हुई तो हम तुम्हें तुम्हारे घर में घुसकर गोली मार देंगे।” वीडियो में आरोपी के पीछे प्रधानमंत्री Narendra Modi और लोकसभा स्पीकर Om Birla की तस्वीरें भी दिखाई दे रही थीं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
कोटा पुलिस का त्वरित एक्शन
कोटा शहर की एसपी तेजस्विनी गौतम के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी को बोरखेड़ा थाने से हिरासत में लिया। पूछताछ जारी है और यह जांच की जा रही है कि, क्या यह किसी बड़े नेटवर्क या संगठन से जुड़ा मामला है? या फिर महज पब्लिसिटी स्टंट?
पुलिस संकेत दे रही है कि आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराएं लगाई जा सकती हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
कांग्रेस का हमला: कांग्रेस नेता Pawan Khera ने वीडियो शेयर करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।
बीजेपी ने झाड़ा पल्ला: बीजेपी कोटा शहर अध्यक्ष राकेश जैन ने स्पष्ट किया कि आरोपी का पार्टी से कोई संबंध नहीं है और ऐसे असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
करणी सेना ने भी किया इनकार: करणी सेना ने भी आरोपी को अपना प्रवक्ता मानने से इनकार कर दिया है।
पब्लिसिटी स्टंट या गहरी साजिश?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या यह सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए की गई सनसनीखेज हरकत थी, या फिर किसी बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा? पुलिस की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर बढ़ती कट्टरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

