MP News Farmers Agriculture Rabi 2026: किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार मिलें खाद बीज एवं अन्य कृषि अनुदान: कृषि उत्पादन आयुक्त श्री गुप्ता

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भोपाल। मध्य प्रदेश में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता ने अधिकारियों को किसानों की जरूरत के अनुसार खाद, बीज और कृषि अनुदान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद-बीज के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए कृषि, सहकारिता और अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करें। साथ ही किसानों को जल्दी बुवाई के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि खेतों में मौजूद मिट्टी की नमी का बेहतर उपयोग हो सके।
भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की खरीफ सीजन 2026 की समीक्षा और रबी सीजन की तैयारियों को लेकर शनिवार को अपेक्स बैंक के सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों संभागों के आयुक्त, विभिन्न विभागों के सचिव, जिला कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
व्हाट्सएप से खाद के लिए टोकन की सुविधा
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि किसानों के लिए खाद वितरण व्यवस्था को आसान बनाया गया है। किसान घर बैठे व्हाट्सएप के माध्यम से खाद के लिए टोकन जनरेट कर सकते हैं। इसके अलावा पंचायत स्तर पर सुविधा केंद्र भी बनाए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि खाद वितरण की माइक्रो प्लानिंग की जाए, ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद मिले और इसके लिए दूर नहीं जाना पड़े।
उन्होंने नकली और अमानक खाद, बीज व कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ऐसे मामलों में संबंधित विक्रेताओं का लाइसेंस निरस्त करने के साथ एफआईआर दर्ज कराने को भी कहा गया। कलेक्टर और कृषि विभाग के अधिकारी ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करें।
नरवाई जलाने पर रोक और संतुलित खाद उपयोग पर जोर
अधिकारियों को नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। किसानों को हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे फसल के अवशेषों को खेत में मिलाने में मदद मिलती है और नरवाई जलाने की जरूरत कम होती है।
किसानों को फसल विविधीकरण, प्रमाणित बीजों के उपयोग, उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही फसल बीमा योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने और मंडियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर जोर दिया गया।
कम पानी वाली फसलों की बुवाई के लिए प्रोत्साहन
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरबड़े ने बताया कि अलनीनो की आशंका को देखते हुए किसानों को जल्दी बुवाई करने और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसमें गेहूं, अलसी, सरसों, मसूर और मटर जैसी फसलें शामिल हैं।
जिन जिलों में प्रेशराइज्ड सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने पर जोर
बैठक में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए गए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि देश में कुल कृषि क्षेत्र के मुकाबले उद्यानिकी फसलों का रकबा लगभग 16.5 प्रतिशत है, जबकि मध्य प्रदेश में यह करीब 9.5 प्रतिशत है।
उन्होंने प्रत्येक जिले में कम से कम एक हजार एकड़ क्षेत्र में उद्यानिकी क्लस्टर विकसित करने का सुझाव दिया। इन क्लस्टरों में जिले की पहचान से जुड़ी विशेष फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण उद्योग विकसित करने में मदद मिल सकती है।
मत्स्य पालन से रोजगार और निवेश बढ़ाने की तैयारी
बैठक में मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। इस नीति का उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करके मछली उत्पादन बढ़ाना, निजी निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
नीति के तहत केज कल्चर, एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, इको-टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि केज स्थापना के लिए अब तक 4.50 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निजी निवेश और 3.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
मत्स्य पालकों का नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने और पात्र पंजीकृत मत्स्य पालकों को 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता, मछली उतारने के केंद्रों और आधुनिक मत्स्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी
पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान, क्षीर धारा ग्राम योजना और हिरण्यगर्भा अभियान के तहत चल रहे कार्यों में तेजी लाने को कहा गया।
पशुपालकों को पशुओं के बेहतर पोषण, गर्भावस्था के दौरान देखभाल और नस्ल सुधार के बारे में जानकारी देने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही दुग्ध सहकारी समितियों और मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन को बढ़ावा देकर दूध संग्रहण बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
गौशालाओं और पशु चिकित्सा सेवाओं की होगी निगरानी
बैठक में गौशालाओं को मिलने वाली सहायता का समय पर सत्यापन, राशि वितरण और उनके संचालन की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए। मनरेगा के तहत स्वीकृत गौशालाओं को जल्द शुरू करने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की नियमित समीक्षा करने तथा नए उद्यमियों को पशुपालन से जोड़ने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा पशु चारा उत्पादन, साइलेज निर्माण, पशु मेलों के व्यवस्थित संचालन और कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों को चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से पशुपालकों तक घर पहुंचकर चिकित्सा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और पशुपालन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।








