अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला: 8 नामजद समेत कई रडार पर

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Vaishali shinde
56 मिनट पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर पहली बार एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। विशेष जांच दल (SIT) अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रहा है।
SIT रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तेज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई तेज की जा रही है। साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में एक सेवानिवृत्त अधिकारी की नियुक्ति की भी चर्चा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
किस पर क्या आरोप?
एफआईआर के अनुसार, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर दानपात्रों की निगरानी के दौरान कथित गबन का आरोप लगाया गया है। लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और मनीष कुमार यादव कैश काउंटिंग टीम का हिस्सा थे, जिन पर नकदी गिनती के दौरान कथित हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच के दौरान लवकुश मिश्रा के घर से लगभग 12 लाख रुपये तथा मनीष यादव के घर से करीब 36 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है, जिसकी जांच जारी है।
वहीं सुभाष चंद्र श्रीवास्तव पर कैश काउंटिंग व्यवस्था की निगरानी में कथित लापरवाही और अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप हैं। करुणेश पांडेय और अविनाश शुक्ला पर दान की रकम को सुरक्षित रूप से काउंटिंग रूम तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और उससे संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं। इन सभी आरोपों की जांच जारी है और अभी किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है।
ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
इस मामले की शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है। वे भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और सितंबर 2025 में ट्रस्ट के सदस्य बनाए गए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305 (पूजा स्थल में चोरी), धारा 306 (सेवक द्वारा चोरी), धारा 316(5) (विश्वास में सौंपी गई संपत्ति का दुरुपयोग), धारा 317(4) और 317(5) (चोरी की संपत्ति का संरक्षण एवं छिपाने में सहायता), धारा 61 (आपराधिक साजिश), धारा 3(5) (सामूहिक अपराध में संयुक्त जिम्मेदारी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अखिलेश यादव ने SIT पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बिना एफआईआर के एसआईटी का कोई औचित्य नहीं है और इसे "Share in Theft" यानी "चोरी में हिस्सेदारी" बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सरकार का रुख स्पष्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की पवित्रता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांचाधीन है और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.




