मुंबई: बाल विवाह रोकने की दिशा में नई पहल: महाराष्ट्र में शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि होगी अनिवार्य?

Trapti Tanwar
17 घंटे पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Sonu rai
17 घंटे पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Trapti Tanwar
19 घंटे पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Saanvi Pandey
21 घंटे पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Vaishali shinde
21 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
Kunal Rao
1 दिन पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
महाराष्ट्र सरकार बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने के लिए एक नया और अनोखा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में जानकारी दी कि सरकार शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन दोनों की जन्मतिथि अनिवार्य रूप से छापने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस पहल का उद्देश्य विवाह से पहले वर-वधू की वैधानिक आयु की पुष्टि करना और बाल विवाह के मामलों को रोकना है।
राजस्थान मॉडल का अध्ययन करेगी महाराष्ट्र सरकार
विधानसभा में भाजपा विधायक अतुल भातखलकर द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि राजस्थान में लागू इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने राजस्थान सरकार से इस मॉडल की जानकारी मांगी है और ग्रामीण विकास तथा कानून एवं न्याय विभाग के साथ मिलकर इसकी व्यवहारिकता का अध्ययन किया जाएगा।
अगले पांच वर्षों में बाल विवाह दर 10% से नीचे लाने का लक्ष्य
अदिति तटकरे ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बाल विवाह की घटनाओं को 10 प्रतिशत से नीचे लाना है। उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक हस्तक्षेप के जरिए इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
राज्य में घट रही है बाल विवाह की दर
मंत्री के अनुसार, वर्ष 2019-21 के सर्वे में महाराष्ट्र में बाल विवाह की दर 21.9 प्रतिशत थी, जो 2023-24 के नवीनतम सर्वे में घटकर 19.6 प्रतिशत रह गई है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 20.1 प्रतिशत से बेहतर माना जा रहा है।
2025-26 में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके गए
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके जा चुके हैं और 136 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इससे पहले 2024-25 में 1,495, 2023-24 में 1,253 और 2022-23 में 930 बाल विवाह रोकने में प्रशासन सफल रहा था।
सिर्फ परिवार नहीं, सहयोगियों पर भी होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह कराने वाले परिवारों के अलावा ऐसे आयोजनों में सहयोग देने वाले पुजारी, बैंड-बाजे वाले, आयोजक, ग्रामसेवक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
प्रिंटिंग प्रेस और विवाह स्थलों की भी तय हो सकती है जिम्मेदारी
प्रस्तावित नियम के तहत शादी के कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस, बैंक्वेट हॉल, मंगल कार्यालय और विवाह मंडप संचालकों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विवाह से जुड़े सभी पक्ष नियमों का पालन करें और नाबालिगों की शादी को बढ़ावा न मिले।
6 जिलों पर विशेष फोकस
सरकार ने बाल विवाह की चुनौती से निपटने के लिए छह संवेदनशील जिलों की पहचान की है। इनमें बीड, छत्रपति संभाजीनगर और परभणी सहित मराठवाड़ा क्षेत्र के कई जिले शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार गन्ना कटाई के लिए होने वाला मौसमी पलायन इन क्षेत्रों में बाल विवाह का एक प्रमुख कारण बनकर सामने आया है।
बाल संरक्षण समितियां निभा रही अहम भूमिका
राज्यभर में जिला एक्शन फोर्स, ग्राम संरक्षण समितियां और पंचायत स्तर की निगरानी समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। सरकार इन संस्थाओं को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक सहायता देने की योजना बना रही है ताकि बाल विवाह के मामलों की समय रहते पहचान कर उन्हें रोका जा सके।
अंतिम निर्णय के बाद बनेगी विस्तृत नियमावली
सरकार द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभाग विस्तृत नियमावली तैयार करेंगे। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो विवाह पत्रिका में जन्मतिथि का उल्लेख आयु सत्यापन का एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य माध्यम बन जाएगा।





