दिल्ली में 3 दिन की ऑटो-टैक्सी हड़ताल शुरू: यात्रियों की बढ़ी परेशानी

Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain!
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Yash Kulkarni
3 घंटे पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Sneha Menon
3 घंटे पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
दिल्ली-एनसीआर में तीन दिन की बड़ी परिवहन हड़ताल हुई । ऑटो, टैक्सी और अन्य कमर्शियल वाहन चालकों की विभिन्न यूनियनों ने 21 मई से 23 मई तक सांकेतिक चक्का जाम का ऐलान किया था । बढ़ती पेट्रोल, डीजल और सीएनजी कीमतों के बीच चालक संगठनों ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस हड़ताल का असर दिल्ली-NCR की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है।
AIMTC के नेतृत्व में दर्जनों यूनियनें आंदोलन में शामिल
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में 60 से अधिक परिवहन यूनियनें इस आंदोलन में शामिल हुई हैं। AIMTC ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत कराया है। यूनियनों का कहना है कि पिछले करीब 15 वर्षों से किराए में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ, जबकि ईंधन, वाहन मेंटेनेंस, बीमा और फिटनेस जैसे खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं।
बढ़ते ECC शुल्क और नई नीतियों पर नाराजगी
परिवहन संगठनों ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में हालिया बढ़ोतरी का भी कड़ा विरोध किया है। यूनियनों का आरोप है कि यह शुल्क अब केवल ट्रांजिट वाहनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजधानी में जरूरी सामान पहुंचाने वाले ट्रकों और कमर्शियल वाहनों पर भी लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और महंगाई का बोझ सीधे आम जनता पर पड़ेगा।
बीएस-4 वाहनों पर प्रस्तावित रोक बना बड़ा मुद्दा
यूनियनों ने 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 कमर्शियल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि लाखों छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्टर अभी भी इन वाहनों पर निर्भर हैं। अचानक प्रतिबंध लगाने से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। संगठनों ने मांग की है कि इस प्रतिबंध को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने किराया संशोधन की उठाई मांग
ऑटो और टैक्सी ड्राइवर संगठनों का कहना है कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण चालकों की कमाई पर भारी असर पड़ा है। चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा कि मौजूदा किराया ढांचा अब घाटे का सौदा बन चुका है और सरकार को तुरंत फेयर रिवीजन करना चाहिए।
यूनियनों ने यह भी मांग की है कि दिल्ली में ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया जाए ताकि पारंपरिक ऑटो और टैक्सी चालकों के हितों की रक्षा हो सके।
दिल्ली-NCR में यात्रियों को हो सकती है भारी परेशानी
तीन दिवसीय हड़ताल के कारण दिल्ली-NCR में ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा । रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस अड्डों और प्रमुख बाजारों में ऑटो और टैक्सी सेवाओं की कमी देखने को मिल सकती है। यूनियनों ने चालकों से अपील की थी कि वे 21, 22 और 23 मई को अपने वाहन सड़कों पर न उतारें।
मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
परिवहन संगठनों ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो यह सांकेतिक हड़ताल आगे चलकर अनिश्चितकालीन आंदोलन का रूप ले सकती है। यूनियनों का दावा है कि परिवहन क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका खतरे में है और सरकार को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।







