जीते-जी करा लिया अपना मृत्यु भोज: शिवपुरी के बुजुर्ग ने खुद कराया कर्मकांड

Diya Gupta
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान भी किया और भावुक भी। करैरा क्षेत्र के ग्राम हाजीनगर में रहने वाले 60 वर्षीय कल्याण पाल उर्फ कल्लू ने जीते-जी अपना मृत्यु भोज और अंतिम कर्मकांड करवा दिया। इस अनोखे आयोजन में हजारों लोग शामिल हुए और पूरे इलाके में इसकी चर्चा होने लगी।
“मौत के बाद कौन करेगा कर्मकांड?”— यही चिंता बनी वजह
अविवाहित और अकेले जीवन जी रहे कल्याण पाल के मन में लंबे समय से यह चिंता थी कि उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार, पिंडदान और मृत्यु भोज जैसी रस्में कौन निभाएगा। परिवार में कोई करीबी जिम्मेदारी निभाने वाला नहीं होने के कारण उन्होंने यह फैसला लिया कि वह अपने सामने ही सभी धार्मिक कर्मकांड और भंडारे का आयोजन कर देंगे।
कल्याण पाल ने कहा कि अक्सर लोग मौत के बाद सिर्फ रस्म निभाते हैं, लेकिन यह भी तय नहीं होता कि सही तरीके से आयोजन होगा या नहीं। इसलिए उन्होंने अपने रिश्तेदारों, परिचितों और गांव वालों को बुलाकर खुद ही यह आयोजन कराया।
प्रयागराज जाकर खुद कराया अपना कर्मकांड
बताया जा रहा है कि आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल प्रयागराज पहुंचे थे। वहां उन्होंने विधि-विधान के साथ अपने नाम से कर्मकांड कराया और गंगा स्नान भी किया। इसके बाद गांव लौटकर उन्होंने 24 घंटे का ‘सीताराम रामधुन पाठ’ शुरू कराया, जिससे पूरे गांव में धार्मिक माहौल बन गया।
मृत्यु भोज की तरह हुआ भव्य भंडारा
शनिवार को धार्मिक अनुष्ठानों के बाद बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन पूरी तरह मृत्यु भोज की तरह था, लेकिन सबसे खास बात यह रही कि जिसका मृत्यु भोज था, वही खुद मेहमानों का स्वागत करता नजर आया।
ग्रामीणों के अनुसार इस भंडारे में करीब 6 से 7 हजार लोग शामिल हुए। आयोजन में भोजन, बैठने और स्वागत की विशेष व्यवस्था की गई थी। गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचे।
वायरल हुआ निमंत्रण कार्ड
इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। कार्ड में लिखा था—
“मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था,
मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था।”
कार्ड में “अंतिम गंगा पूजन और भंडारा” का उल्लेख था, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए और आयोजन के पीछे की वजह जानने को उत्सुक हो गए।
अकेलेपन ने लिया भावुक फैसला
जानकारी के मुताबिक कल्याण पाल अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं और उन्होंने शादी नहीं की। इसी कारण उन्हें हमेशा यह डर सताता था कि उनकी मृत्यु के बाद धार्मिक परंपराएं अधूरी न रह जाएं। अब इस आयोजन के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें मानसिक सुकून मिला है और वह निश्चिंत महसूस कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस अनोखे आयोजन को लेकर सोशल Media पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अकेलेपन की पीड़ा बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। वहीं कई लोग कल्याण पाल के इस फैसले को भावुक और अनोखा बता रहे हैं।






