राम मंदिर चढ़ावा विवाद गहराया: दान में मिले सोना-चांदी और नकदी के रिकॉर्ड पर SIT की पैनी नजर

Trapti Tanwar
16 घंटे पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Riya Jain
16 घंटे पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Pooja Reddy
20 घंटे पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Sonu rai
22 घंटे पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
राम नगरी अयोध्या इस समय किसी धार्मिक आयोजन या उत्सव के कारण नहीं, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई नकदी, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच विशेष जांच दल (SIT) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियां दान राशि और आभूषणों के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं।
श्रद्धालुओं के दावों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
सोशल मीडिया पर कई श्रद्धालुओं ने मंदिर में दिए गए दान को लेकर सवाल उठाए हैं। कर्नाटक के एक श्रद्धालु ने दावा किया कि उन्होंने राम मंदिर को एक कीमती हार दान किया था, लेकिन उन्हें उसकी कोई रसीद प्राप्त नहीं हुई और बाद में उस हार की स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसी प्रकार अन्य श्रद्धालुओं द्वारा भी दान के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों से घंटों पूछताछ
सूत्रों के अनुसार SIT ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों से पूछताछ की है। ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय, ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा गोपाल राव से कई दौर की पूछताछ की गई। जांच टीम ने दान राशि की गणना, रिकॉर्ड संधारण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बयान जुटाए हैं।
दान की गिनती प्रक्रिया में सामने आए नए नाम
बताया जा रहा है कि पुनः पूछताछ के दौरान टिन्नू यादव ने दान राशि की गणना प्रक्रिया में कुछ प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका का उल्लेख किया है। SIT इन बयानों की पुष्टि के लिए विभिन्न साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि दान की गिनती और उसके रिकॉर्ड प्रबंधन में कहीं कोई व्यवस्थित गड़बड़ी तो नहीं हुई।
नकदी रिकॉर्ड में मिलीं कथित खामियां
जांच के दौरान नकदी के रिकॉर्ड में कई विसंगतियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि रिकॉर्ड और वास्तविक प्रक्रियाओं के बीच अंतर के संकेत मिले हैं। हालांकि अभी तक किसी भी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है।
वीवीआईपी पास जारी करने के अधिकार पर भी सवाल
जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि गोपाल राव, जो ट्रस्ट में किसी आधिकारिक पद पर नहीं बताए जाते, कथित रूप से वीवीआईपी दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि उनकी पहचान का उपयोग कर अन्य व्यक्तियों द्वारा भी पास जारी किए गए या नहीं।
मंदिर निर्माण सामग्री की खरीद भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार मंदिर निर्माण के दौरान पत्थरों और अन्य निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया में कुछ व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। SIT यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं निर्माण कार्यों और दान प्रबंधन के बीच कोई ऐसा संबंध तो नहीं था, जिससे वित्तीय पारदर्शिता प्रभावित हुई हो।
सीसीटीवी फुटेज बनी सबसे बड़ी चुनौती
मामले की जांच में सबसे बड़ी बाधा सीसीटीवी फुटेज को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार मंदिर परिसर में लगे कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहता है। ऐसे में कई वर्षों पुराने घटनाक्रमों की पुष्टि करना कठिन हो गया है। जांच एजेंसियां फोरेंसिक तकनीकों के माध्यम से अधिकतम फुटेज रिकवर करने का प्रयास कर रही हैं।
फुटेज से छेड़छाड़ के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज हटाई गई थी। हालांकि उपलब्ध बैकअप सीमित होने के कारण इन आरोपों की पुष्टि करना आसान नहीं है। यदि हाल के समय में किसी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ हुई होगी, तो उसके साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है।
संदिग्धों के बयान बनेंगे जांच का आधार
जांच टीम विभिन्न कर्मचारियों, पदाधिकारियों और संदिग्ध व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि बयानों के मिलान और फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गड़बड़ियां कब से चल रही थीं और दान राशि या बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में वास्तव में कोई अनियमितता हुई या नहीं।
CM योगी के अयोध्या दौरे पर भी निगाहें
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इस बीच मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसियों की गतिविधियों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
अभी तक नहीं हुई किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि
महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक SIT, जिला प्रशासन या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किसी भी वित्तीय अनियमितता अथवा चोरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।





