भोपाल में पुलिसकर्मी ही साइबर ठगी का शिकार: दोस्त का नाम लेकर ठग ने ऐंठे 1.63 लाख रुपये

दोस्त का नाम लेकर ठग ने ऐंठे 1.63 लाख रुपये
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Ayaan Khan

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0 सेकंड पहले

Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

Kabir Shukla

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0 सेकंड पहले

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Yash Kulkarni

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51 मिनट पहले

Poori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

1 घंटे पहले

Society ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से सावधान रहने की सलाह देने वाली पुलिस का एक कर्मचारी ही साइबर अपराधियों के जाल में फंस गया। पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ प्रधान आरक्षक दिलीप कुमार से एक शातिर ठग ने करीब 1.63 लाख रुपये की ठगी कर ली।

 

सीआरपीएफ जवान बनकर किया फोन, दोस्त का नाम लेकर जीता भरोसा
गोविंदपुरा थाना पुलिस के अनुसार 43 वर्षीय दिलीप कुमार वर्तमान में पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ हैं और पुलिस लाइन गोविंदपुरा में परिवार के साथ रहते हैं। 9 जून को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताया और कहा कि वह उनके बचपन के मित्र योगेश आठनेरे का परिचित है।
बातचीत के दौरान आरोपी ने बताया कि उसका दूसरे शहर में तबादला हो गया है और वह अपना घरेलू फर्नीचर कम कीमत में बेचना चाहता है। परिचित व्यक्ति का नाम सुनकर दिलीप कुमार को उस पर भरोसा हो गया।

 

व्हाट्सएप पर भेजीं तस्वीरें, 80 हजार में तय हुआ सौदा
आरोपी ने व्हाट्सएप पर सोफा सेट, डाइनिंग टेबल और अन्य घरेलू सामान की तस्वीरें भेजीं। साथ ही दावा किया कि योगेश ने बताया था कि दिलीप को फर्नीचर की आवश्यकता है। इसके बाद दोनों के बीच पूरे फर्नीचर का सौदा 80 हजार रुपये में तय हुआ। आरोपी ने एडवांस के रूप में 10 हजार रुपये मांगे, जो दिलीप कुमार ने ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।

 

ट्रांसपोर्ट और एंट्री शुल्क के नाम पर बढ़ती गई रकम
एडवांस मिलने के बाद ठग ने अलग-अलग बहाने बनाकर और पैसे मांगने शुरू कर दिए। पहले शेष 70 हजार रुपये जमा करवाए गए। इसके बाद सेना की ट्रांसपोर्ट लाइन और एंट्री प्रक्रिया का हवाला देकर 41,500 रुपये ट्रांसफर करवाए गए।
इतना ही नहीं, आरोपी ने तकनीकी त्रुटि का बहाना बनाकर दोबारा 41 हजार रुपये और 500 रुपये की अतिरिक्त राशि भी जमा करवा ली। इस तरह कुल मिलाकर 1.63 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।

 

टैक्स के नाम पर नई मांग ने खोली ठगी की पोल
मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन शुल्क के नाम पर 23,150 रुपये और मांगे। लगातार बढ़ती रकम की मांग से दिलीप कुमार को संदेह हुआ। उन्होंने आगे भुगतान करने से इनकार करते हुए अपनी जमा राशि वापस मांगी।
हालांकि आरोपी ने पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया और अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। इसके बाद पीड़ित ने गोविंदपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

 

पुलिस जांच में जुटी, साइबर अपराधियों की नई चाल पर चिंता
गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि शिकायत के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी को पीड़ित और उसके परिचितों के बारे में पहले से कुछ जानकारी थी, जिसके आधार पर उसने विश्वास हासिल कर ठगी की पूरी योजना को अंजाम दिया।

 

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं। किसी भी ऑनलाइन लेन-देन से पहले पहचान की स्वतंत्र पुष्टि करना और संदिग्ध भुगतान मांगों से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

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Ayaan Khan

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Kabir Shukla

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Yash Kulkarni

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Ritika Ghosh

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Society ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.

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