PSLV मिशन में बार-बार विफलता से बढ़ी चिंता: PM के निर्देश पर VSSC दौरा

PM के निर्देश पर VSSC दौरा
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भारत के सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यानों में गिने जाने वाले पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) की लगातार हो रही विफलताओं ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रत्यक्ष निर्देशों पर 22 जनवरी को तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) का एक अत्यंत गोपनीय दौरा किया।

तीसरे चरण की विफलता पर फोकस
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, डोवाल का यह दौरा खास तौर पर PSLV के तीसरे चरण में बार-बार सामने आ रही तकनीकी गड़बड़ियों की गहराई से जांच के लिए किया गया था। 12 जनवरी 2026 को हुए PSLV मिशन में उड़ान के इसी चरण में असामान्यता सामने आई थी, जिससे मिशन अधूरा रह गया।

तोड़फोड़ की आशंका की भी हुई जांच
VSSC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डोवाल ने लॉन्च व्हीकल के डिजाइन, निर्माण और परीक्षण प्रक्रियाओं पर विस्तार से सवाल किए। इस दौरान तोड़फोड़ (Sabotage) की आशंका को भी पूरी गंभीरता से परखा गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किसी साजिश की संभावना नहीं है।

C-61 और C-62 मिशन से जुड़ी समानताएं
यह विफलता PSLV C-61 (18 मई 2025) मिशन से मिलती-जुलती रही, जहां तीसरे चरण के प्रज्वलित न होने से रणनीतिक महत्व का उपग्रह नष्ट हो गया था। PSLV C-62 मिशन में भी PS3 चरण के अंत में विसंगति दर्ज की गई थी, जिसके बाद विस्तृत तकनीकी विश्लेषण शुरू किया गया।

डोवाल रिपोर्ट पर आधारित मंत्री का बयान
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का हालिया बयान—जिसमें उन्होंने तोड़फोड़ की संभावना से इनकार किया—दरअसल NSA डोवाल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर आधारित था। रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की साजिश की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रक्रियात्मक कमियों को चिन्हित किया गया है।

सुधारात्मक कदम और भविष्य की योजना
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि PSLV की अगली उड़ान से पहले सभी तकनीकी सुधारों को सख्ती से लागू किया जाए। इसरो का मानना है कि इन सुधारों से PSLV की विश्वसनीयता को फिर से मजबूत किया जा सकेगा और वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रम
डोवाल की यह समीक्षा दर्शाती है कि सरकार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और उससे जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। तकनीकी मूल्यांकन और सुरक्षा निगरानी के बीच संतुलन बनाकर भविष्य की संभावित चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार की जा रही है।

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