Starlink Controversy: भारत में एंट्री से पहले ही विवादों में स्टारलिंक, एलन मस्क ने अंबानी पर लगाया आरोप

Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेFans ka reaction toh dekhne wala hoga!
Diya Gupta
1 घंटे पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Dev Kapoor
2 घंटे पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
Saanvi Pandey
4 घंटे पहलेChampion ban ke dikhao, hum saath hain!
मशहूर उद्योगपति एलन मस्क को बहुचर्चित स्पेसएक्स प्रोजेक्ट की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक ने अभी भारत में एंट्री भी नहीं की है लेकिन वह आने के पहले से ही विवादों में आ गया है। दरअसल मामला यह है स्टारलिंक को सेवाएं शुरू करने की मंजूरी नहीं दी है, भारत सरकार द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर और स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए प्रतीक्षा में रखा गया है। इतना ही नहीं स्टारलिंक विवाद में भारतीय राजनीति की भी एंट्री हो गई है। मंजूरी में देरी के लिए एलन मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पड़ी करते हुए कहा है कि भारतीय व्यापार समूहों और रिलायंस जियो पर बाजार में स्टारलिंक को मंजूरी मिलने के लिए बाधा डाल रहे हैं। वहीं लोकसभा प्रतिपक्ष नेता ने भी मस्क की पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मामले का राजनीतिकरण कर दिया है। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि जब कोई विदेशी नेटवर्क मंजूरी चाहता है तो सुरक्षा की दृष्टि से जांच और अहम हो जाती है, और यह सामान्य प्रक्रिया है।
मस्क ने कहा “प्रधानमंत्री अंबानी”, राहुल ने कहा-“आप बदलने का इंतजार कीजिए”
स्टारलिंक को भारत में अंतिम मंजूरी के विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब एलन मस्क ने एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अंबानी मुझे पता नहीं था कि भारत में आप निर्णय लेते हैं। इस पोस्ट के बाद राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डियर मस्क आप भारत में प्रधानमंत्री बदलने तक इंतजार कीजिए। इस बयानबाजी से राजनीति का बाजार भी गर्म हो गया है। जिससे मोदी समर्थक और विरोधी सोशल मीडिया पर अपनी तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
विदेशी नियंत्रण वाले नेटवर्क पर बारीक जांच और कड़ी नियमावली
हालांकि भारत सरकार और संचार मंत्रालय ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि स्टारलिंक, जियो और एयरटेल सहित सभी सैटेलाइट ऑपरेटर एक ही मानक नियामक और सुरक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के अधीन हैं। मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में देरी के लिए भारतीय अधिकारियों ने अतीत में ऐसे उदाहरणों का उल्लेख किया है जहां मणिपुर और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियानों के दौरान अनाधिकृत स्टारलिंक उपकरण पाए गए थे, जिसके चलते विदेशी नियंत्रण वाले नेटवर्क पर जांच को और कड़ा कर दिया गया है।
स्टारलिंक मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा भारी
वहीं जानकारों की मानें तो सैटेलाइट कम्यूनिकेशन उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि भारत में स्टारलिंक को मूल्य निर्धारण को लेकर एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जहां स्थानीय मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) ब्रॉडबैंड प्लान की कीमत आमतौर पर 500 से 1,500 रूपये प्रति माह के बीच होती है, जबकि उपग्रह उपकरण और सदस्यता की लागत अधिक होने की उम्मीद है। इससे मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।








