Somnath Food Ban: सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर रोक बरकरार

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन पर रोक बरकरार
गुजरात हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगी रोक को फिर से बहाल कर दिया है। इससे पहले सिंगल जज ने होटल और रेस्तरां संचालकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस प्रतिबंध को रद्द कर दिया था। हालांकि, राज्य सरकार की तत्काल अपील के बाद डिवीजन बेंच ने उस फैसले पर रोक लगा दी।
चार घंटे के भीतर बदला फैसला
शुक्रवार को दोपहर करीब 3 बजे न्यायमूर्ति निशा ठाकोर ने गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर के आसपास होटल और रेस्तरां संचालकों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए कलेक्टर के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था। इसके बाद गुजरात सरकार ने तत्काल अपील दायर की। मुख्य न्यायाधीश मानस रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निर्जर देसाई की खंडपीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई करते हुए सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी।
500 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त 2026 को जारी कलेक्टर का नोटिफिकेशन फिलहाल प्रभावी रहेगा। इसके तहत सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली छह चिन्हित सड़कों पर मांसाहारी भोजन बनाने, रखने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
सरकार ने धार्मिक महत्व का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि सोमनाथ मंदिर लाखों हिंदुओं के लिए असाधारण आध्यात्मिक महत्व रखता है। सरकार ने कहा कि किसी स्थान की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए वहां व्यावसायिक गतिविधियों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सरकार ने हरिद्वार जैसे अन्य धार्मिक शहरों में लागू प्रतिबंधों का भी उदाहरण दिया।
होटल संचालकों ने उठाया मौलिक अधिकार का मुद्दा
होटल और रेस्तरां मालिकों ने अदालत में तर्क दिया कि मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध उनके वैध व्यवसाय करने और आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि व्यवसाय करने की संवैधानिक स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि हर स्थान पर हर तरह की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति दी जा सकती है।
26 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
डिवीजन बेंच ने फिलहाल कलेक्टर के नोटिफिकेशन को प्रभावी रखते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। तब तक सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन बनाने, रखने और बेचने पर लगी रोक जारी रहेगी।








