बांदा POCSO कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: डार्क वेब पर वीडियो बेचने वाले दंपति को फांसी

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उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष POCSO अदालत ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए 34 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो डार्क वेब पर बेचने के मामले में आरोपी दंपति रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में रखते हुए मृत्युदंड को न्यायोचित ठहराया।
विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने 163 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में कहा कि यह अपराध मानवता के खिलाफ है और समाज को कड़ा संदेश देने के लिए कठोरतम दंड आवश्यक है। अदालत ने प्रत्येक पीड़ित को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
CBI जांच और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) ने की। यह खुलासा तब हुआ जब INTERPOL की ओर से ई-मेल के जरिए सूचना मिली कि आरोपी डार्क वेब के माध्यम से बाल अश्लील सामग्री विदेशों में बेच रहा है। जांच में 47 देशों तक इस नेटवर्क के तार जुड़े पाए गए।
CBI ने 31 अक्टूबर 2020 को मामला दर्ज कर 16 नवंबर 2020 को आरोपी दंपति को गिरफ्तार किया। करीब पांच वर्षों की विस्तृत जांच के बाद 990 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई।
कौन हैं आरोपी?
मुख्य आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में निलंबित जूनियर इंजीनियर था और चित्रकूट क्षेत्र में तैनात रहा। उसकी पत्नी दुर्गावती अपराध में बराबर की भागीदार पाई गई। जांच में सामने आया कि दोनों 2010 से 2020 के बीच बच्चों को बहलाने-फुसलाने, खिलौनों और पैसों का लालच देकर घर बुलाते और उनका यौन शोषण करते थे।
34 मासूमों का शोषण
जांच में सामने आया कि पीड़ित बच्चों की उम्र 3 वर्ष से 18 वर्ष से कम थी। कई बच्चों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं, कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मानसिक आघात से कई बच्चे आज भी जूझ रहे हैं। अदालत ने इसे संगठित और योजनाबद्ध अपराध बताया।
घर से बरामद हुए डिजिटल सबूत
छापेमारी के दौरान 10 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, 6 पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, डिजिटल कैमरा और लाखों रुपये नकद बरामद हुए। फॉरेंसिक जांच में 34 वीडियो और 679 आपत्तिजनक तस्वीरें मिलीं। अदालत ने डिजिटल साक्ष्यों को निर्णायक माना।
मुआवजा और जुर्माना
अदालत ने राज्य सरकार को प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। साथ ही आरोपियों के घर से बरामद नकदी को भी पीड़ितों में समान रूप से वितरित करने का आदेश दिया गया। रामभवन पर 6.45 लाख रुपये और दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
“रेयरेस्ट ऑफ रेयर” करार
अदालत ने कहा कि यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है। सरकारी पद पर रहते हुए आरोपी ने विश्वास का घोर दुरुपयोग किया। कोर्ट के अनुसार, सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती, इसलिए मृत्युदंड ही उचित दंड है।
यह फैसला न केवल पीड़ित बच्चों के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि बाल यौन शोषण जैसे अपराधों पर कानून बेहद सख्त है।

