मेरठ में डीएसपी का ऑडियो वायरल: थाने में वीडियोग्राफी पर मुकदमे के निर्देश से मचा विवाद

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थाने में वीडियोग्राफी पर मुकदमे के निर्देश से मचा विवाद

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उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। ब्रह्मपुरी सर्किल की डीएसपी सौम्या अस्थाना का एक 29 सेकंड का ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में कथित तौर पर थाने के अंदर वीडियो बनाने वाले पत्रकारों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।
ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई और मामला सोशल मीडिया से लेकर पत्रकारिता जगत तक चर्चा का विषय बन गया।

क्या है वायरल ऑडियो में?
वायरल ऑडियो क्लिप में डीएसपी सौम्या अस्थाना अपने सर्किल के थानाध्यक्षों को निर्देश देती सुनाई दे रही हैं कि अगर कोई व्यक्ति—खासकर पत्रकार—थाने के अंदर वीडियो बनाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए।
बताया जा रहा है कि यह संदेश उनके सर्किल के सभी थाना प्रभारियों को भेजा गया था। जैसे ही यह ऑडियो पत्रकारों और सोशल मीडिया तक पहुंचा, मामला तेजी से वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
ऑडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला कदम बताया। विवाद बढ़ने के बाद मेरठ पुलिस को इस मामले पर सफाई देनी पड़ी।

एसएसपी अविनाश पांडेय की सफाई
मामला बढ़ने पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय सामने आए और उन्होंने कहा कि डीएसपी के निर्देशों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। एसएसपी के अनुसार: यह निर्देश पत्रकारों के लिए नहीं थे। यह कुछ ऐसे “पोर्टल चलाने वालों” के लिए था, जो बिना वजह थानों के अंदर वीडियो बनाते हैं। मीडिया के लिए थानों में वीडियो रिकॉर्डिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि ऑडियो की भाषा में पत्रकारों का जिक्र स्पष्ट रूप से सुनाई देता है।

कानून क्या कहता है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पुलिस थाने में मीडिया द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है Official Secrets Act (OSA) 1923 के तहत पुलिस थाने को “निषिद्ध स्थान” की श्रेणी में नहीं रखा गया है। अदालतों ने भी कई मामलों में स्पष्ट किया है कि पुलिस स्टेशन सार्वजनिक संस्थान हैं, जहां रिपोर्टिंग की जा सकती है।
हालांकि यह भी जरूरी है कि रिकॉर्डिंग से पुलिस अधिकारियों के काम में बाधा न पहुंचे।

डीएसपी की ओर से अब तक नहीं आई प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर डीएसपी सौम्या अस्थाना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, पुलिस विभाग इस मामले को शांत करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। कई पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस तरह के निर्देश दिए जाते हैं, तो यह मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है। वहीं पुलिस का पक्ष है कि फर्जी या अनावश्यक वीडियो बनाकर पुलिस की छवि खराब करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है।

मेरठ में वायरल हुए इस 29 सेकंड के ऑडियो ने पुलिस और मीडिया के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन भले ही इसे गलतफहमी बता रहा हो, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब देखना होगा कि इस विवाद पर आगे पुलिस विभाग या डीएसपी सौम्या अस्थाना की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है।

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