फीस की ‘फाइल’ में दबा छात्रा का भविष्य: शिक्षा के अधिकार पर उठे सवाल
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रायबरेली जिले के सलोन कोतवाली क्षेत्र के उमरन गांव से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक निजी स्कूल द्वारा फीस बकाया होने के कारण 11वीं कक्षा की छात्रा को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया। छात्रा के पिता की कैंसर से मृत्यु हो चुकी है और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
उमरन गांव की रहने वाली छात्रा अनुष्का ने आरोप लगाया है कि उसके पिता स्वर्गीय राजेश कुमार वैश्य के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में परिवार पहले ही टूट चुका था। ऐसे में स्कूल की 63 हजार रुपये बकाया फीस जमा न कर पाने के कारण उसे परीक्षा देने से रोक दिया गया।
छात्रा का कहना है कि वह पिछले तीन महीनों से स्कूल नहीं जा रही थी। परीक्षा की जानकारी उसे स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप से मिली। शनिवार को जब वह पहला पेपर देने पहुंची, तो उसे फीस जमा न होने का हवाला देकर वापस भेज दिया गया।
स्कूल प्रशासन का पक्ष
निमिषा कान्वेंट स्कूल की प्रधानाचार्य रीना मिश्रा के अनुसार, छात्रा की कक्षा नौ से कुल 63 हजार रुपये फीस बकाया है। उन्होंने बताया कि: पिता के निधन की जानकारी मिलने पर छात्रा को 10वीं की परीक्षा में बैठने दिया गया था। 11वीं में प्रवेश के समय परिवार ने फीस जमा करने का आश्वासन दिया था। केवल एक माह की फीस जमा की गई, लेकिन पूरे वर्ष पढ़ाई जारी रखी गई। स्कूल का कहना है कि कई बार सूचना देने के बावजूद फीस जमा नहीं की गई।
तहसील में दी शिकायत
पीड़ित छात्रा अनुष्का ने तहसील सलोन पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उसने अपील की है कि आर्थिक संकट को देखते हुए उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए और स्कूल के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
शिक्षा का अधिकार या आर्थिक बाध्यता?
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आर्थिक तंगी के कारण किसी छात्र का भविष्य दांव पर लगाया जा सकता है?
देश में शिक्षा को मौलिक अधिकार माना गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर निजी स्कूलों की फीस वसूली की सख्ती कई बार जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी बाधा बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए और मानवीय आधार पर समाधान निकालना चाहिए, ताकि किसी भी छात्र का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।
मानसिक दबाव में छात्रा
अनुष्का के अनुसार, लगातार फीस के दबाव और परीक्षा से वंचित किए जाने के कारण वह मानसिक रूप से बेहद परेशान है। परिवार पहले ही पिता के निधन के दुख से उबर नहीं पाया है, ऐसे में यह घटना उनके लिए और भी पीड़ादायक बन गई है।
प्रशासन की भूमिका पर निगाह
अब देखना यह है कि स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। यदि छात्रा को परीक्षा से वंचित किया जाना नियमों के विरुद्ध पाया गया, तो स्कूल पर कार्रवाई संभव है।

