इबादत पर हमला: वायरल वीडियो से मचा बवाल
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उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर ज़िले के रुद्रपुर में एक बुजुर्ग मुस्लिम मज़दूर के साथ नमाज़ पढ़ते समय मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति नमाज़ पढ़ रहे शख्स को धक्का देता है, लात-घूंसे मारता है और डंडे से पीटता है। आरोप है कि पीड़ित को जबरन धार्मिक नारे लगाने के लिए भी कहा गया।
कौन हैं पीड़ित?
पीड़ित मोहम्मद शाहिद (लगभग 50 वर्ष), रेशमबाड़ी निवासी हैं और पिछले 22 वर्षों से राजमिस्त्री का काम कर रहे हैं। इन दिनों वे अटरिया देवी मंदिर के पास एक निर्माणाधीन मकान में कार्यरत थे। शाहिद का कहना है कि वे पिछले चार दिनों से पास के एक खाली मैदान में नमाज़ अदा कर रहे थे। उनका दावा है कि उन्होंने वहां के माली से अनुमति भी ली थी और किसी को आपत्ति नहीं थी।
क्या हुआ घटना के दिन?
शाहिद के मुताबिक, घटना के दिन दोपहर लगभग डेढ़ बजे वे नमाज़ पढ़ने बैठे थे। तभी एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया और लात-घूंसे मारने लगा। जब वे अपनी टोपी, रूमाल और आधार कार्ड उठाकर जाने लगे तो आरोप है कि हमलावर ने बांस के डंडे से उनकी पिटाई की। वीडियो में कथित आरोपी यह कहते हुए सुना जा सकता है – "मंदिर के सामने नमाज पढ़ने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?" पीड़ित का आरोप है कि उन्हें “जय श्री राम” का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया और न मानने पर नहर में फेंकने की धमकी दी गई।
आरोपी कौन?
मामले में अरविंद शर्मा नाम के व्यक्ति पर आरोप है, जो कथित रूप से मंदिर समिति से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति को पहले भी वहां नमाज़ पढ़ने से रोका गया था और केवल वहां से हटाया गया।
पुलिस की कार्रवाई
ऊधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित की शिकायत पर पंतनगर थाने में अरविंद शर्मा और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, 351(3) और 352 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल?
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है। शाहिद ने कहा: “नमाज़ अदा करना गुनाह कैसे हो सकता है? हम रोज़ा रख रहे हैं। अगर पहले ही आपत्ति होती तो मैं वहां नहीं जाता।” घटना ने राज्य की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ और धार्मिक सह-अस्तित्व पर बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया है। हालांकि, सत्ताधारी दल की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है।
सोशल मीडिया पर उबाल
वायरल वीडियो के बाद इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे मानवता पर हमला बताया है, जबकि कुछ ने इसे कानून-व्यवस्था का मामला बताते हुए जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील की है।
कानूनी और सामाजिक पहलू
विशेषज्ञों का मानना है कि:
धार्मिक स्वतंत्रता भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है।
किसी भी नागरिक के साथ मारपीट दंडनीय अपराध है।
ऐसी घटनाएं सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं।
जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होगी।
रुद्रपुर की यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था की परीक्षा है। पुलिस जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की कार्रवाई आने वाले दिनों में स्थिति को स्पष्ट करेंगे।
सवाल यह है — क्या उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय राज्य में धार्मिक आस्था का सम्मान सुरक्षित रहेगा?

