Rewa Cowshed Scam: रीवा में गोशाला निर्माण के नाम पर 37.85 लाख की गड़बड़ी

Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Reyansh Joshi
43 मिनट पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Ritika Ghosh
2 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Aditya Verma
3 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Rohan Desai
3 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Saanvi Pandey
4 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Neha Tripathi
6 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
रीवा में गोशाला निर्माण के नाम पर वित्तीय अनियमितता
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के दभौरा क्षेत्र में मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत गोशाला निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। परियोजना के लिए 37.85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच के अनुसार, निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान किया गया। मामले में एजेंसी ने पूर्व अधिकारियों और सप्लायर समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपों की जांच अभी जारी है।
जांच में मौके पर अधूरा निर्माण मिला
योजना के तहत गोशाला, बछड़ा शेड, चारा स्टोर, बीमार मवेशियों के लिए शेड, बोरवेल, 6,000 लीटर की पानी की टंकी, बाउंड्री वॉल और जमीन समतल करने जैसे काम प्रस्तावित थे। EOW के भौतिक सत्यापन में कथित तौर पर केवल 80 बाई 25 फीट की आंशिक रूप से बनी बाउंड्री वॉल और एक अधूरा ढांचा मिला। जांच एजेंसी के मुताबिक, मवेशियों के लिए जरूरी शेड और पानी जैसी सुविधाएं मौके पर उपलब्ध नहीं थीं।
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
जांच के दौरान ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा के कुछ अधिकारियों पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतने और छतरपुर के सप्लायर दीनदयाल कुशवाहा को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, एक ही काम के लिए दिसंबर 2020 की अलग-अलग तारीखों वाले दो कथित फर्जी शॉर्ट-टेंडर दस्तावेज तैयार किए गए। आरोप है कि टेंडर फीस और बयाना राशि जमा नहीं होने तथा आवश्यक सामग्री की पूरी दर सूची नहीं दिए जाने के बावजूद फर्म को सबसे कम बोली लगाने वाला घोषित कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया।
पोर्टल पर बिल और भुगतान की जांच
EOW के अनुसार, मनरेगा पोर्टल पर परियोजना से संबंधित कुल 27.38 लाख रुपये के बिल अपलोड किए गए थे। इनमें से 20.22 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था। जांच एजेंसी का आरोप है कि मौके पर काम की स्थिति और भुगतान के बीच गंभीर अंतर मिला। इस मामले में दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्य से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी
इस मामले में नामजद लोगों में पूर्व कार्यकारी अभियंता राजेंद्र सिंह धुर्वे, डी.एस. अर्मो और हिमांशु तिवारी, पूर्व उप-विभागीय अधिकारी जगदीश सिंह राजपूत, पूर्व सहायक ग्रेड-III कर्मचारी लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला और सप्लायर दीनदयाल कुशवाहा शामिल हैं। EOW ने इनके खिलाफ कथित आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
मनरेगा परियोजनाओं की निगरानी पर सवाल
इस मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी निर्माण परियोजनाओं की निगरानी, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। गोशाला का उद्देश्य निराश्रित मवेशियों को आश्रय और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना था। ऐसे निर्माण कार्यों में भौतिक सत्यापन, खर्च का पारदर्शी रिकॉर्ड और समय पर निरीक्षण महत्वपूर्ण हैं, ताकि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए हो सके।
स्पेशल अपडेट
EOW ने रीवा के दभौरा क्षेत्र में गोशाला निर्माण से जुड़े मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। जांच के अनुसार, परियोजना की स्वीकृत लागत 37.85 लाख रुपये थी, जबकि 20.22 लाख रुपये का भुगतान हो चुका था। आगे की जांच में टेंडर दस्तावेजों, भुगतान और वास्तविक निर्माण की स्थिति की पड़ताल की जाएगी। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।







