India Green Hydrogen Mission: ग्रीन हाइड्रोजन से भारत को मिलेगी ऊर्जा मजबूती

ग्रीन हाइड्रोजन से भारत को मिलेगी ऊर्जा मजबूती
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Ravi sinha

Ravi sinha

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RBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.

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ग्रीन हाइड्रोजन से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की तैयारी
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक हर साल 50 लाख मीट्रिक टन यानी 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा।

 

2030 तक एक लाख करोड़ रुपये बचाने का अनुमान
सरकार के अनुमान के मुताबिक, मिशन के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने से वर्ष 2030 तक जीवाश्म ईंधन के आयात पर होने वाले खर्च में करीब एक लाख करोड़ रुपये की सालाना बचत हो सकती है। यह पहल कच्चे तेल और अन्य आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम करने के साथ देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।

 

आठ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश की उम्मीद
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है। इसके साथ ही विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, अनुसंधान और परियोजना विकास जैसे क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। इससे स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उद्योगों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।

 

कार्बन उत्सर्जन घटाने में मिलेगी मदद
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, मिशन के तहत तय उत्पादन और उपयोग का लक्ष्य हासिल होने पर हर साल करीब 5 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है। इससे भारत के जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और उद्योगों में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

 

कई राज्यों ने बनाई ग्रीन हाइड्रोजन नीति
ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल ने समर्पित नीतियां अधिसूचित की हैं। वहीं हरियाणा, पंजाब, बिहार और केरल अपनी नीतियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ ने भी ग्रीन हाइड्रोजन को अपनी मौजूदा औद्योगिक या नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों में शामिल किया है।

 

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर
भारत इस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और निवेश बढ़ाने के लिए कई देशों के साथ समझौते और संयुक्त घोषणाएं कर चुका है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग से जुड़े कदम उठाए हैं। इसके अलावा नीदरलैंड्स के साथ नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन भी किया गया है।

 

भारत-अमेरिका हाइड्रोजन टास्क फोर्स का गठन
भारत और अमेरिका के बीच स्ट्रैटेजिक क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप के तहत इंडिया-यूएस हाइड्रोजन टास्क फोर्स बनाई गई है। ग्रीन हाइड्रोजन को दोनों देशों की नई और उभरती नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों से जुड़ी कार्ययोजना का भी अहम हिस्सा माना गया है। इस सहयोग का उद्देश्य तकनीक, अनुसंधान और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाना है।

 

ग्रीन हाइड्रोजन के लिए प्रमाणन व्यवस्था
ग्रीन हाइड्रोजन की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया को विश्वसनीय तरीके से प्रमाणित करने के लिए अप्रैल 2025 में ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम ऑफ इंडिया शुरू की गई थी। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी प्रमाणन एजेंसियों को अधिकृत करता है। जून 2026 में इस व्यवस्था के लिए एक डिजिटल पोर्टल भी शुरू किया गया, जिससे प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

 

भारत को वैश्विक केंद्र बनाने की योजना
सरकार का लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए घरेलू विनिर्माण, तकनीकी विकास, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, 2030 के लक्ष्यों को हासिल करना उत्पादन लागत, बुनियादी ढांचे और बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

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