Tiger Reserve Tracks Wildlife: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पगमार्क से होगी वन्यजीवों की निगरानी

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इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पगमार्क से होगी वन्यजीवों की निगरानी
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पगमार्क इम्प्रेशन पैड (PIP) तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। इसके जरिए जंगल में बाघ, तेंदुए और दूसरे वन्यजीवों की आवाजाही का पता लगाने में मदद मिलेगी। रेत और नरम मिट्टी पर उभरने वाले पैरों के निशान वन विभाग को यह समझने में सहायता करेंगे कि वन्यजीव किन रास्तों से गुजर रहे हैं और उनकी गतिविधियां किन क्षेत्रों में अधिक हैं।
200 पैड बनाने की योजना, 133 बीट में होगी निगरानी
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब 200 पगमार्क इम्प्रेशन पैड तैयार करने की योजना है। इससे रिजर्व की 133 बीट में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनके आवागमन वाले रास्तों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इन पैड पर वन्यजीवों के साथ शिकारियों के पैरों के निशान भी दर्ज हो सकते हैं। इससे जंगल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में वन विभाग को सहायता मिलेगी।
संरक्षण की रणनीति को मिलेगी मजबूती
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार गुप्ता के अनुसार, पगमार्क इम्प्रेशन पैड वन्यजीवों की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इनके जरिए मिलने वाले निशान जंगल में वन्यजीवों की मौजूदगी और उनकी आवाजाही के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देंगे। हालांकि, इन संकेतों का सही आकलन करना और उन्हें निगरानी के अन्य तरीकों के साथ जोड़ना भी जरूरी होगा। इससे वन्यजीव संरक्षण की रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
एक इंच मिट्टी हटाकर तैयार होगी नरम सतह
पगमार्क इम्प्रेशन पैड तैयार करने के लिए जंगल की पगडंडियों और वन्यजीवों के गुजरने वाले रास्तों पर ऊपरी सख्त मिट्टी को लगभग एक इंच तक हटाया जाएगा। इसके बाद वहां बारीक छनी हुई रेत या नरम मिट्टी बिछाई जाएगी। इस सतह से गुजरने वाले वन्यजीवों के पैरों के निशान स्पष्ट रूप से उभर आएंगे। वन विभाग इन निशानों का अध्ययन कर संबंधित क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों का अनुमान लगा सकेगा।
तीन राज्यों की सीमाओं से लगा है इंद्रावती रिजर्व
बीजापुर जिले में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमाओं से लगा हुआ है। यहां घने जंगल और विविध प्राकृतिक आवास मौजूद हैं। बाघ, तेंदुआ, वनभैंसा, भालू, चीतल, सांभर, गौर, जंगली सूअर और ऊदबिलाव सहित कई वन्यजीव इस क्षेत्र में पाए जाते हैं। पक्षियों और छोटे जीवों के लिए भी यह जंगल महत्वपूर्ण प्राकृतिक आश्रयस्थल है।
बाघ के निशान मिलने पर बढ़ाई जा सकेगी गश्त
पगमार्क इम्प्रेशन पैड से मिलने वाले संकेतों के आधार पर उन इलाकों की पहचान की जा सकती है, जहां बाघ और तेंदुए जैसे बड़े शिकारी वन्यजीवों की आवाजाही अधिक है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग गश्त और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दे सकता है। इसके अलावा चीतल, सांभर, गौर और अन्य वन्यजीवों के निशान भी उनकी मौजूदगी और आवागमन को समझने में मदद करेंगे। इस पहल से जंगल के अलग-अलग हिस्सों की निगरानी और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।








