Global Market Crash: दुनिया भर के शेयर बाजारों में मची भगदड़

Priya Iyer
0 सेकंड पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेShare market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.
दुनिया भर के शेयर बाजारों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिका, जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया समेत प्रमुख वैश्विक बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बढ़ती चिंता के बीच वैश्विक इक्विटी बाजारों में हड़कंप जैसी स्थिति बन गई है।
भारतीय बाजार के प्रमुख संकेतक गिफ्ट निफ्टी में शुरुआती कारोबार के दौरान 200 से 300 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव बना रह सकता है। हालांकि शुरुआती कमजोरी के बाद भारतीय बाजार में कुछ सुधार देखने को मिला।
बुधवार को भारतीय बाजार में रही भारी उथल-पुथल
बीते कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,000 अंकों से अधिक टूटकर 73,500 के करीब पहुंच गया था, जबकि एनएसई निफ्टी भी 23,150 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में खरीदारी लौटने से दोनों प्रमुख सूचकांकों ने नुकसान का बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया। सेंसेक्स अंत में लगभग 303 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी सीमित नुकसान के साथ कारोबार समाप्त करने में सफल रहा। इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया।
एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट
गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। जापान का निक्केई इंडेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 1,500 अंक तक टूट गया। वहीं हांगकांग के हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। यूरोप के प्रमुख सूचकांक FTSE-100, CAC और DAX पर भी दबाव देखने को मिला। वैश्विक निवेशकों द्वारा जोखिम भरे निवेशों से दूरी बनाने के कारण अधिकांश बाजार लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
अमेरिकी बाजारों में भी दिखा दबाव
बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी बिकवाली का दौर जारी रहा। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 600 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं S&P 500 और नैस्डैक इंडेक्स में भी कमजोरी दर्ज की गई। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने नैस्डैक पर अतिरिक्त दबाव बनाया। निवेशक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
पश्चिम एशिया संकट बना गिरावट की बड़ी वजह
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव, मिसाइल हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने बाजारों में जोखिम की भावना को मजबूत किया है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर दिखाई दे रहा है।
भारतीय बाजार में रिकवरी की उम्मीद
शुरुआती दबाव के बावजूद भारतीय बाजार में दिन चढ़ने के साथ कुछ मजबूती देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने निचले स्तरों से वापसी की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे और घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी के कारण बाजार में रिकवरी की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसलों पर टिकी हुई है, जिनका बाजार की आगामी दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। विशेषज्ञ निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने से बचने और लंबी अवधि की निवेश रणनीति पर कायम रहने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के फैसले बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।








