पटना में रिटायर्ड प्रोफेसर से ₹82 लाख की साइबर ठगी: व्हाट्सएप कॉल से डराकर करोड़ों का साइबर फ्रॉड

व्हाट्सएप कॉल से डराकर करोड़ों का साइबर फ्रॉड
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Simran Arora

Simran Arora

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पटना में एक रिटायर्ड प्रोफेसर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹82.53 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित मोहम्मद गयासुद्दीन ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला शहर में चर्चा का विषय बन गया है। साइबर अपराधियों की तलाश जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।


 CBI अधिकारी बनकर दिया गया झांसा
साइबर अपराधियों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर प्रोफेसर को फोन किया। उन्हें बताया गया कि उनका नंबर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल है। गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें डराया गया। जांच में सहयोग न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसी डर का फायदा उठाकर ठगी की योजना बनाई गई। पीड़ित लगातार मानसिक दबाव में रहे।


 करीब 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा
ठगों ने पीड़ित को 27 मार्च से 8 अप्रैल तक यानी करीब 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए लगातार निगरानी और दबाव बनाया गया। उन्हें किसी से संपर्क करने से मना किया गया। डर और दबाव के कारण उन्होंने अलग-अलग किस्तों में पैसे ट्रांसफर कर दिए। RTGS और UPI के जरिए कुल ₹82.53 लाख अलग-अलग खातों में भेजे गए। बाद में भी उन्हें धमकाया जाता रहा।

 

 व्हाट्सएप कॉल से बनाया गया जाल
ठगों ने व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल कर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। पुलिस ने लोगों से ऐसी कॉल से सावधान रहने की अपील की है। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस तरह डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता। संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए। जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।


 शिकायत के बाद खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक परिचित व्यक्ति ने पीड़ित से मुलाकात की। पूरी घटना बताने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान का प्रयास जारी है।


पुलिस ने जारी की चेतावनी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि "डिजिटल अरेस्ट" नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी CBI, पुलिस या सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसे ट्रांसफर की मांग नहीं करती। ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल काटकर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। साइबर अपराध रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। पुलिस लगातार लोगों को सतर्क कर रही है।

 

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