डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट पर ED का बड़ा एक्शन: गोवा साइबर ठगी में 3 आरोपी गिरफ्तार

Simran Arora
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Sneha Menon
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Riya Jain
9 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Nisha Shah
10 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Vivaan Gupta
10 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Ishaan Tiwari
11 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Kavya Mishra
11 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Pihu Agarwal
12 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Rohan Desai
13 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
प्रवर्तन निदेशालय के पणजी जोनल कार्यालय ने गोवा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत तीन आरोपियों भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला गोवा के एक नागरिक से करोड़ों रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पीड़ित को अलग-अलग तरीकों से डराकर और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई। इसके बाद ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजे जाने की जानकारी सामने आई। ED अब आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की भूमिका और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।
गोवा के नागरिक से ₹2.60 करोड़ की ठगी
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में गोवा के एक नागरिक को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निशाना बनाया गया था। साइबर ठगों ने कथित तौर पर पीड़ित को जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर अपने जाल में फंसाया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में करीब ₹2.60 करोड़ की रकम ट्रांसफर कराई गई। ठगी की रकम के लेनदेन की जांच करते हुए ED को इस नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का इस्तेमाल किन लोगों ने किया और रकम को आगे कहां भेजा गया। मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे साइबर नेटवर्क की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। ED की जांच में मनी ट्रेल को महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है।
मामले में अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार
इस कार्रवाई के साथ ही डिजिटल अरेस्ट से जुड़े इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इससे पहले ED ने 23 अगस्त 2026 को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया था। अब 27 अगस्त 2026 को भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण की गिरफ्तारी की गई है। जांच एजेंसी इन सभी आरोपियों के बीच संबंध और उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है। ED यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को किस तरह अलग-अलग खातों में भेजा गया। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
₹27,850 करोड़ से ज्यादा के बैंकिंग लेनदेन की जांच
ED की जांच में इस मामले से जुड़े बैंक खातों में बेहद बड़ा वित्तीय लेनदेन सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, इन खातों में ₹27,850 करोड़ से अधिक का बैंकिंग टर्नओवर पाया गया है। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है और अब पूरे मनी ट्रेल की जांच की जा रही है। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रकम में साइबर अपराध से हासिल पैसा कितना शामिल है। संदिग्ध बैंक खातों के जरिए रकम को अलग-अलग स्थानों पर भेजे जाने की जानकारी भी जांच का हिस्सा है। एजेंसी खातों, लेनदेन और आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद इस बड़े वित्तीय नेटवर्क की वास्तविक भूमिका और पैसों के स्रोत को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
PMLA के तहत आरोपियों पर कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने इस पूरे मामले में PMLA यानी Prevention of Money Laundering Act के तहत कार्रवाई की है। एजेंसी ने तीनों आरोपियों को 27 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था और इसके बाद उन्हें विशेष PMLA अदालत के सामने पेश किया गया। अदालत ने भूषण मोये, विलास पवार और शैलेश चव्हाण को 1 सितंबर 2026 तक ED की हिरासत में भेजा था। हिरासत के दौरान जांच एजेंसी आरोपियों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क और वित्तीय गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। ED बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी है। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाना है। साथ ही मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क की जांच जारी
ED की कार्रवाई के बाद अब इस डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट की जांच और तेज होने की उम्मीद है। जांच एजेंसी साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अन्य वित्तीय माध्यमों की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही आरोपियों से जुड़े डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी के बाद रकम को किन-किन खातों में भेजा गया और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। जांच में सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर अन्य संदिग्ध लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। ED की कोशिश इस पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालकों और वित्तीय कड़ियों तक पहुंचने की है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी से जुड़े और भी अहम खुलासे सामने आने की संभावना है।








