Online Gaming Fraud Cyber Crime Gwalior News: ग्वालियर में ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर साइबर ठगी, रोज 4-5 लोग बन रहे शिकार

ग्वालियर में ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर साइबर ठगी, रोज 4-5 लोग बन रहे शिकार
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ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। लोगों को घर बैठे हजारों और लाखों रुपये कमाने का लालच देकर फर्जी गेमिंग ऐप्स के जाल में फंसाया जा रहा है। ठग पहले छोटी रकम जिताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर बड़ी रकम जमा करवाकर ठगी करते हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, साइबर सेल के सामने रोजाना ऐसे करीब 4 से 5 मामले सामने आ रहे हैं।

 

 

सोशल मीडिया के विज्ञापनों से बिछाया जाता है जाल

साइबर ठग इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गेम खेलकर पैसे कमाने के विज्ञापन दिखाते हैं। इनमें कम समय में मोटी कमाई और बड़े इनाम जीतने का दावा किया जाता है। विज्ञापनों के जरिए लोगों को व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर संपर्क कर संदिग्ध गेमिंग ऐप डाउनलोड करने के लिंक भेजे जाते हैं।

 

कई बार ये ऐप आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय थर्ड-पार्टी वेबसाइट से डाउनलोड कराए जाते हैं। मुफ्त इनाम, गेमिंग स्किन, हथियार और इन-गेम करेंसी का लालच देकर भी लोगों को फिशिंग लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जाता है।

 

 

पहले जिताते हैं छोटी रकम, फिर लगवाते हैं बड़ा दांव

ठगी के इस तरीके में शुरुआत में लोगों को 100 से 500 रुपये तक जिताए जाते हैं। कुछ मामलों में यह रकम बैंक खाते में भी भेजी जाती है, ताकि लोगों को ऐप पर भरोसा हो जाए। इसके बाद उन्हें वीआईपी गेम, मेगा टूर्नामेंट और बड़े इनाम का लालच देकर ज्यादा पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

 

ऐप पर जीत की बड़ी रकम दिखाई जाती है, जिससे खिलाड़ी और ज्यादा पैसे जमा करने लगता है। लेकिन जब वह अपनी जीती हुई रकम निकालने की कोशिश करता है, तो विड्रॉल रोक दिया जाता है या टैक्स, फीस अथवा अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। इस तरह छोटी जीत के लालच में लोग अपनी बड़ी रकम गंवा बैठते हैं।

 

 

फर्जी ऐप से मोबाइल की जानकारी को खतरा

ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी का खतरा केवल पैसों तक सीमित नहीं है। संदिग्ध लिंक से डाउनलोड की गई APK फाइल में मैलवेयर हो सकता है, जो मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी को नुकसान पहुंचा सकता है या उसकी चोरी में मदद कर सकता है।

 

ऐसे ऐप अनावश्यक परमिशन मांग सकते हैं। यदि यूजर बिना जांच किए SMS, कॉन्टैक्ट्स या अन्य संवेदनशील सुविधाओं की अनुमति दे देता है, तो उसकी निजी जानकारी और वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसलिए किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

 

 

साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान


सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप या टेलीग्राम पर मिले अनजान लिंक से गेमिंग ऐप डाउनलोड न करें।


कम समय में मोटी कमाई और गारंटीड इनाम का दावा करने वाले ऐप्स से सावधान रहें।

किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंकिंग OTP, UPI PIN या पासवर्ड न बताएं।


ऐप को बिना जरूरत SMS, कॉन्टैक्ट्स और स्क्रीन शेयरिंग जैसी परमिशन न दें।


पैसे निकालने के लिए अतिरिक्त रकम जमा करने की मांग हो, तो सतर्क हो जाएं।


संदिग्ध ऐप डाउनलोड कर लिया है, तो उसकी परमिशन जांचें और जरूरत पड़ने पर उसे हटाएं।

 


ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

अगर ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर आपके साथ साइबर ठगी होती है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।

 

ऑनलाइन गेमिंग में कमाई का लालच लोगों की मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकता है। इसलिए किसी भी गेमिंग ऐप पर पैसे लगाने से पहले उसकी सत्यता जांचें और अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखें। थोड़ी-सी सतर्कता आपको साइबर ठगी का शिकार होने से बचा सकती है।

 

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